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15 जुलाई, 2020|4:41|IST

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अमर्त्य सेन की झोलाछाप पॉलिसी पर भड़का आईएमए

नोबल पुरस्कार विजेता जाने माने अर्थशास्त्री अमत्र्य सेन देशभर के निजी डॉक्टरों के निशाने पर आ गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में झोलाछापों को प्रशिक्षण देकर उनके हाथों में चिकित्सा कार्य की जिम्मेदारी सौंपने का जो सुझाव दिया, उसे ममता बनर्जी सरकार लागू करने जा रही है। इसके विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने देशभर में आंदोलन का ऐलान किया है। आईएमए के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सभी शाखाओं को आंदोलन करने का निर्देश जारी किया है।

आईएमए केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बीएससी कम्युनिटी हेल्थ कोर्स का विरोध कर रहा है। सरकार का इरादा ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को इस कोर्स को कराकर उन्हें अपने क्षेत्र में चिकित्सक बनाना है। आईएमए और एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) इसका कड़ा विरोध कर रहा है। आईएमए की तरफ से इसके विरोध में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने स्थगनादेश जारी कर दिया था। मगर, पश्चिम बंगाल सरकार ने झोलाछापों को प्रशिक्षित करके उन्हें चिकित्सक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। आईएमए के प्रांतीय निर्वाचित अध्यक्ष डॉक्टर विनय गुप्ता ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने यह फैसला जाने माने अर्थशास्त्री अमत्र्य सेन के सुझाव को देखते हुए किया है। आईएमए इसका पुरजोर विरोध करता है। एसोसिएशन की तरफ से राष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध करने का निर्णय लिया गया है। पश्चिम बंगाल में आईएमए इसे लागू नहीं होने देगा। डॉ.गुप्ता ने कहा कि अमत्र्य सेन जैसे अर्थशास्त्री को सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार लाने के लिए मानव संसाधन की उपलब्धता को लेकर आवश्यक समाधान बताने चाहिए। अगर वह वित्तीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर और गुणवत्तापरक चिकित्सा सेवाओं को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव प्रस्तुत करें तो आईएमए इसका स्वागत करेगा।

आईएमए के खिलाफ पॉलिसी कतई मंजूर नहीं
राष्ट्रीय नेतृत्व से मिली जानकारी का हवाला देते हुए आईएमए के प्रांतीय निर्वाचित अध्यक्ष डॉ.विनय गुप्ता ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार को आईएमए द्वारा निर्धारित पॉलिसी पॉलिसी के विरुद्ध कोई भी कदम नहीं उठाने दिया जाएगा। इसके लिए आईएमए की पश्चिम बंगाल ब्रांच को आक्रामक रणनीति तैयार करने को कहा गया है। आईएमए ने साफ कर दिया है कि राज्य मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत हुए बिना कोई भी व्यक्ति आधुनिक चिकित्सा में प्रैक्टिस नहीं कर सकता। आईएमए मुख्यालय द्वारा इस निर्णय के खिलाफ कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में सरकारी डॉक्टरों की संस्था लीवर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने गांवों के झोलाछापों को प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कार्यक्रम को सरकार की तरफ से स्वीकृति मिलने की बात लगभग साफ हो गई है।

इन बिन्दुओं पर होगा जोरदार विरोध
1. उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रशिक्षित झोलाछाप की तैनाती से वहां पर अनुचित मानव संसाधन प्रबंधन की स्थिति पैदा हो जाएगी।
2. स्वास्थ्य कार्यक्रमों का फायदा लोगों तक पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर आशाएं अपनी भागीदारी सक्रियता से निभा रही हैं। इस संवेदनशील क्षेत्र में झोलाछापों को कार्य करने का मौका देने से शिशु मृत्यु दर बढ़ने की आशंका पैदा होगी।
3. आईएमए की मांग है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए सरकार निजी चिकित्सकों की सेवाएं संविदा पर प्राप्त करने का प्रयास करे।
4. ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करने के लिए मेडिकल स्नातकों और परास्नातकों को कम से कम छह महीने वहां गुजारने की व्यवस्था लागू की जाए।

 

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