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11 अप्रैल, 2020|12:24|IST

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गोकुल में खेली गई छड़ीमार होली

गोकुल में खेली गई छड़ीमार होली

भगवान कृष्ण के गांव गोकुल में रविवार को दोपहर बाद जमकर छड़ीमार होली खेली गई। हुरियारों को प्रेम पगी छडि़यों से गोपियों ने पीटा। कान्हा के रंग में रंगी गोपियों ने किसी को नहीं छोड़ा।  

इस रंगारंग होली ने विदेशियों ने जमकर मजे लिए। कान्हा के हमजोली ग्वाल-बाल हुरियारे-चंचल गुजरिया बनी आज गोरी कहकर गोपियों को छेड़ रहे थे। साथ ही दोनों होली खेलने में व्यस्त भी थे। गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण बाल रूप में रहे थे इसलिए कान्हा को लाठी से चोट लग सकती थी। उन्हें ज्यादा चोट न लगे इसलिए गोपियां छड़ी लेकर आई। रविवार को गोपियों ने हुरियारों पर जमकर छड़ी बरसाई और हुरियारों ने लाठी से छड़ी के वार को रोका। हर समाज की तरह भारतीय समाज की भी अपनी स्वस्थ परंपराएं हैं और हर कोई उसका पालन भी करता है। लोगों की भीड़ और रंगों व अबीर.गुलाल से पुते चेहरे में कौन किसे पहचान सकता है।  

भारत में हर त्योहार पर संगीत का जादू चढ़कर बोलता है। हर त्योहारों पर ढेरों लोकगीत रचे गए हैं। ऐसे में होली पर लोकगीत न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। कन्हैया की नगरी मथुरा में इन दिनों होली का बुखार हर किसी पर चढ़ा हुआ है। हर कोई रंगों के इस त्योहार की मस्ती में डूब जाना चाहता है। गोकुल में छड़ी होली खेली गई। गोकुल में गोपिया लठामार होली के बजाय छड़ी मार होली खेलती हैं। 

मान्यता है कि गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण बाल रूप में रहे थे इसलिए कान्हा को लाठी से चोट लग सकती थी। उन्हें ज्यादा चोट न लगे इसलिए छड़ी से होली खेलती हैं। गोकुल में रविवार को हर साल की तरह इस बार भी जमकर होली खेली गई। होली के इस पावन अवसर पर हर वर्ग को लोगों ने भाग लिया। लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में रविवार को जमकर होली खेली गई। राधा की इस पवित्र स्थली में होली खेलने का महत्व ही अलग होता है।