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इस शख्स ने जातीय मैनेजमेंट से भाजपा को पहुंचाया शिखर तक

इस शख्स ने जातीय मैनेजमेंट से भाजपा को पहुंचाया शिखर तक

भाजपा की प्रचंड बहुमत से जीत के बाद अब पार्टी के प्रदेश संगठन में बड़े फेरबदल की संभावना है। पार्टी को जीत का सेहरा बांधने वाले पूरे चुनाव के प्रमुख रणनीतिकार प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल को अब बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने के संकेत मिल रहे हैं। भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 325 सीटें दिलाने के बाद बंसल की पार्टी में काफी अहम भूमिका हो गई है।

लोस चुनाव के लिए प्रदेश प्रभारी बनाए गए अमित शाह की नजर उन पर पड़ी तो 2013 में अपने साथ यूपी ले आए। दोनों ने 2009 में लोस के 10 सांसदों वाली भाजपा को 73 सीटें दिलवाईं। बसंल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के माइक्रो मैनेजमेंट सिस्टम को आत्मसात किया। शाह के सांगठनिक गुणों को सीखने की ललक ही थी कि लोस चुनाव में शाह की कार्यशैली को सुनील रोज-ब-रोज डायरी में नोट करते।

प्रदेश में कुल 1 लाख 47 हजार बूथ कमेटियां हैं। सबसे पहले उन्होंने बनाई गई करीब 55 हजार 21 सदस्यीय बूथ कमेटियों को बढ़ाकर 1 लाख 28 हजार तक पहुंचाया। इनके सहारे उन्होंने भाजपा पर शहरी और सवर्णों की पार्टी के लगे लेबल को हटाया। गांव-गांव तक बूथ कमेटियों का गठन कर इनमें दलित, पिछड़े, अति पिछड़े, ब्राहृण, वैश्य ठाकुर, जाट, गुर्जर जैसी सभी जातियों को प्रतिनिधत्वि दिया। इसी जातीय समीकरण के हिसाब से भाजपा ने जो टिकट बंटवारा किया, उसमें श्री बंसल की अहम भूमिका रही।

सुनील बंसल की सांगठानिक क्षमता का लोहा गुजरात, कर्नाटक, हिमांचल प्रदेश जैसे राज्य भी मान रहे हैं, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने को हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड जैसे राज्यों के भाजपा संगठन बंसल से यूपी में जीत के लिए तैयार किए गए रोडमैप की डिमान्ड कर रहे हैं। श्री बंसल अपनी एक पुस्तक जीत के मंत्र तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा रोडमैप का डिजिटलाइजेशन भी किया गया है। इसका प्रेजेन्टेशन गुजरात के संगठन को दिखाया जा चुका है। अब वह लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए है।

लोकसभा चुनाव के बाद बंसल को किसी बड़े नेता ने उनको गुरुमंत्र दिया कि संगठन पर पकड़ बनाना है तो जिलों में प्रवास करो और रात वहीं बिताओ। सुनील ने वैसा ही किया । बंसल के पास बूथ कमेटी के साढ़े 11 लाख पदाधिकारियों के फोन नम्बर हैं, जिनसे वह विधानसभा चुनाव के दौरान हर हफ्ते बात करते थे। यही नहीं भाजपा प्रदेश मुख्यालय में हाईटैक इनफारमेशन टेक्नालॉजी से लैस इलेक्शन वार रूम उनकी ही सोच की परिणीति है। वार रूम में प्रदेश के 4 करोड़ मतदाताओं के फोन नम्बरों से सीधा संपर्क किया जाता है।

सुनील बंसल ने वर्ष 1989 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सहारे छात्र जीवन में ही राजनीति के गुण सीखकर जयपुर के लाल बहादुर शाह डिग्री कालेज में छात्र संघ का चुनाव लड़ा। उसके बाद एबीवीपी के संगठन मंत्री रहकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। फिर 2005 से दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की राजनीति करने के दौरान ही भाजपा के लिए काम करने लगे। बंसल की गिनती कुशल सांगठनिक क्षमता वाले नेताओं में प्रमुख रूप से होती है।

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  • Web Title:cast management of bjp