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वेस्ट यूपी पसंद आया भाजपा का एंटी रोमियो स्क्वायड

वेस्ट यूपी पसंद आया भाजपा का एंटी रोमियो स्क्वायड

संक्षेप:

वेस्ट यूपी में जिस तरह से बीजेपी को वोट मिले उससे तो साफ है कि बाकी रणनीति के साथ ही बीजेपी का एंटी रोमियो स्क्वायड बनाने का ऐलान लोगों ने हाथोंहाथ लिया। पार्टी ने सत्ता में आने के बाद छेड़छाड़ और...

Sat, 11 March 2017 11:02 PMमेरठ। वरिष्ठ संवाददाता
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वेस्ट यूपी में जिस तरह से बीजेपी को वोट मिले उससे तो साफ है कि बाकी रणनीति के साथ ही बीजेपी का एंटी रोमियो स्क्वायड बनाने का ऐलान लोगों ने हाथोंहाथ लिया। पार्टी ने सत्ता में आने के बाद छेड़छाड़ और अश्लीलता को लेकर होने वाली घटनाओं पर रोक लगाने के लिए इस स्क्वायड के गठन का ऐलान किया था। शुरू से ही इस ऐलान को लेकर चर्चाएं हो रही थी।

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मेरठ के मवाना और सरधना में छेड़छाड़ को लेकर कई बार सांप्रदायिक टकराव हो चुका है। आए दिन मेरठ शहर में भी छेड़छाड़, अश्लीलता और स्कूली छात्राओं से होने वाली घटनाओं को लेकर लगातार माहौल गरमाया रहता है। इतना ही नहीं मुजफ्फरनगर के कवाल में तो वर्ष 2013 में छेड़छाड़ को लेकर दो संप्रदाय के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद दंगा हो गया था। छेड़छाड़ और अश्लीलता वेस्ट यूपी की कानून-व्यवस्था को कभी भी पलीता लगा रहा है। वेस्ट यूपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इसी प्वाइंट को कैश किया। घोषणा पत्र में बीजेपी ने एंटी रोमियो स्क्वायड बनाने का ऐलान किया था। इस बात को वेस्ट यूपी की जनता ने भी इस ऐलान का समर्थन किया। वेस्ट यूपी के लिए नासूर बन चुकी छेड़छाड़ पर लगाम लगेगी, इसी उम्मीद के साथ जनता ने बंपर वोटिंग की। नतीजे भी भाजपा के पक्ष में रहे और वेस्ट यूपी में बीजेपी को सभी सीटों पर विजय मिली।

मेरठ में बीजेपी को सात में से छह सीटें, सहारनपुर में सात में से चार सीट, बुलंदशहर में सात में से सात सीट, मुजफ्फरनगर में छह में से छह सीट, शामली और बागपत में दोनों जगह तीन-तीन सीटों में से दो-दो सीटें मिली। इसके अलावा हापुड़ में तीन में से एक सीट और गाजियाबाद में पांच में से पांच सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी जीते। नोएडा में भी तीन में से तीन सीटें मिली है जो बताने के लिए काफी है कि एंटी रोमियो स्क्वायड को वेस्ट की जनता को पसंद है।

स्कूल-कालेजों के बाहर रहता है मनचलों का पहरा

मेरठ समेत कई जिलों में स्कूल-कालेजों के बाहर मनचलों का पहरा रहता है। आए दिन छात्राओं से छेड़छाड़ होती है। कई बार तो छात्राएं बदनामी के डर से ही विरोध तक नहीं करती। पुलिस से भी इसी डर की वजह से शिकायत नहीं की जाती। जब मामला कभी तूल पकड़ता तो पुलिस अभियान चलाती, लेकिन कभी भी स्थाई समाधान नहीं हो सका। ज्यादातर संप्रदाय विशेष के युवकों को छेड़छाड़ करते हुए पकड़ा जाता तो सांप्रदायिक टकराव की स्थिति बन जाती।

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