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हिसाब मांग रही शहीदों की सरजमीं

कभी काकोरी काण्ड को अंजाम देकर अंग्रेजी हुकूमत को खारिज करने वाली शाहजहांपुर की सरजमीं अजीबोगरीब सी बेताबी समेटे है। बेताबी उन युवाओं में है, जो सियासी तस्वीर बदलने का माद्दा रखते दिख रहे हैं। युवा वोटरों की 6 लाख की तादाद फिज़ा बनाने-बिगाड़ने में खासी भूमिका में है। सियासत उन्हें बदरंग दिखती है। विकास की कोरी गाथाएं उन्हें सालती हैं। वजहें वे खुद बताते हैं-विकास के नाम पर जेबें भरी जा रही हैं, जो उन्हें नागवार है।

सियासी समर में शाहजहांपुर का मूड भांपना फिलहाल तो सहज नहीं। ठीक वैसे ही जैसे यहां के नौजवानों के मंसूबों को 1925 में अंग्रेजी हुकूमत के बड़े से बड़े खुफिया सूरमा नहीं भांप सके। यहीं के सात बाशिंदों राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाकउल्ला खां, बनारसी लाल, हरगोविंद, इंदू भूषण और प्रेमकिशन ने काकोरी में अंग्रेजों का खजाना लूट कर उन्हें हैरत में डाल दिया था। कुछ वैसे ही आज यहां के युवा किसी विद्रोही सी बातें करते दिखते हैं।

शाहजहांपुर का सरदार पटेल इंटर कॉलेज सिने स्टार राजपाल यादव की यादें समेटे है। इसी कॉलेज के सभागार में राजपाल ने रंगमंच का ककहरा सीखा। कॉलेज के प्रिंसिपल आरके शर्मा कहते हैं-‘नि:संदेह जनसेवक होना पड़ेगा। ठीक ही हुआ कि अन्ना ने जनता को जांच एजेंसी बना दिया। अब लोग समझ रहे हैं उनके पास भी ताकत है।’ बीते सालों में शाहजहांपुर को क्या मिला? शिक्षा का स्तर ऊंचा नहीं होगा तो तरक्की कहां से होगी?

इंटर का छात्र जीशान व उसके कुछ साथी पहली बार वोट डालने वालों में शामिल हैं। जीशान बोला, वोट उसे ही मिलेगा जो तरक्की कराए। देश की तरक्की, प्रदेश की तरक्की। दूसरे देशों से पीछे है इंडिया। पैंतीस साल पीछे। बात खत्म हो, उसके पहले मोहित बोल उठा- ‘ऐसे को वोट देंगे जो सच्च हो, जेब न भरे।’ 

पड़ोस में एक कोचिंग सेंटर के छोटे से कमरे में छात्र-छात्राएं खचाखच भरे हैं। शाम के 6.30 बजे का वक्त है। छात्रों में एक सोनू कुमार खड़ा हुआ। कहता है-‘लीडर को भ्रष्टाचारी नहीं होना चाहिए। देख रहे हैं सड़कों पर चलना मुश्किल है, जाम-गड्ढे और गंदगी। ’ क्लासरूम के बाकी छात्र जो अब तक शांत थे.हां..हां..कर एक साथ बोल पड़े। हर किसी के अपने तर्क हैं, लेकिन सब हालात बदलने के लिए फिक्रमंद है।

काकोरी काण्ड के क्रांतिकारी मुरारी शर्मा (असली नाम मुरारी लाल गुप्ता) के घर पर उनके पोते विवेक विद्रोही मिले जो नामी कवि दामोदर स्वरूप विद्रोही के बेटे हैं। विवेक कहते हैं-‘इतिहास दोहरा रहा है। फिर वही आजादी के बाद वाली तस्वीर लोग देखना चाहते हैं। साफ छवि का उनका प्रतिनिधि हो।’ शायद यही वजह है कि क्रांतिकारी शहीद अशफाक उल्ला खां के खानदान की तीसरी पीढ़ी सियासत में किस्मत आजमाने को मैदान में है। उनके सगे भाई के पोते अशफाक उल्ला खां लखीमपुरखीरी की मोहम्मदी से सियासी समर में उतरे हैं। उनके छोटे भाई आफाकउल्ला खां एक शेर के जरिये आज के नेताओं की करनी बयां करते हैं-‘अब उजाले भी कहने लगे हैं एक दिया जला दीजिए, आप रहजन हैं या रहनुमा कुछ तो अपना पता दीजिए..।’

पांच प्रमुख समस्याएं
ट्रैफिक जाम और संकरी खस्ताहाल सड़कें
महिलाओं के लिए सिर्फ एक ही डिग्री कालेज।
बेरोजगारों के अनुपात में पर्याप्त उद्योग नहीं।
कृषि में तकनीकी विकास के लिए बड़ा शैक्षिक संस्थान।
ऑर्डीनेंस क्लोदिंग फैक्टरी की दुर्दशा और कालीन उद्योग की बंदी।

उम्मीद
जाम खत्म करने के लिए रिंग रोड
चिकित्सा के और बेहतर इंतजाम
मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग कालेज

2007 में कौन कहां काबिज
शाहजहांपुर: सुरेश खन्ना-भाजपा
निगोही: रोशन लाल वर्मा-बसपा
तिलहर: राजेश यादव-सपा
जलालाबाद: नीरज कुशवाहा-बसपा
ददरौल: अवधेश वर्मा-बसपा

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