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22 अप्रैल, 2021|4:15|IST

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तपेदिक के शहर में उम्मीद की किरणें

तपेदिक के शहर में उम्मीद की किरणें

कल तक हम उत्तर प्रदेश के ‘जाटलैंड’ में थे। आज आपको उस धरती पर ले आया हूं, जहां से मशहूर ‘यादवलैंड’ शुरू होती है। रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव लोकसभा में यहां का प्रतिनिधित्व करते हैं। पर चर्चा न यादवों की, न उत्तर प्रदेश के यादव परिवार की। हम सुहागनगरी के साथ इस क्षेत्र के उन मुद्दों पर बात करेंगे, जो अक्सर बिसरा दिए जाते हैं।

यहां यह साफ कर देना जरूरी है कि ‘जाटलैंड’ या ‘यादवलैंड’ कभी कुछ पुराने पत्रकारों के जुमले थे। यदि इस इलाके में यादव बहुलता है तो अन्य पिछड़ी जातियों में पहचान की पुरानी कश्मकश भी कायम है। लोध और कुर्मी अक्सर यादवों से दो-दो हाथ करते नजर आते हैं। वैसे ही जैसे जाटव और अन्य दलित कभी-कभार अलग खानों में बंटे दिखाई पड़ते हैं।

जाति और धर्म की इन्हीं कसमसाहटों के बीच कभी मुलायम सिंह ने अपनी जगह बनाई थी। अब अखिलेश उसे नए आयाम देने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा ने यहां भी उनके खिलाफ कड़ी लामबंदी की है।

फिरोजाबाद वह शहर है, जिसे इस देश की हर सुहागिन जानती है। कभी रंग—बिरंगी चूड़ियां यहां की मंडियों में सजा करती थीं, पर अब चीन के उत्पादों ने चूड़ियों के साथ कांच के सामानों की चमक कुंद कर दी है। व्यापारियों से मेरा सवाल था कि आपको उद्योगों के लिए हालात कैसे लगते हैं? जवाब मिला, ‘हम निराश हैं। ‘ताज ट्रिपेजियम जोन’ का हिस्सा होने के कारण हमारी कोयले की भट्टी पर पहले ही अंकुश लग गया था। जनप्रतिनिधियों ने वादा किया था कि वे सस्ती गैस दिला देंगे, पर ऐसा नहीं हो सका।’ दूसरे व्यापारी का कहना था कि हम सुरक्षित महसूस नहीं करते। मेरा प्रतिप्रश्न था, ‘तो क्या आप असुरक्षित महसूस करते हैं?’ उन्होंने जवाब दिया, ‘ऐसा नहीं है।’ कोई असुरक्षित न होकर भी सुरक्षित महसूस न करे, यह कैसे हो सकता है?

इस बयान की सच्चाई जानने की गरज से मैंने कुछ महिलाओं से पूछा तो उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार ने महिला हेल्पलाइन यानी 1090 और पुलिस कंट्रोलरूम के 100 नंबर को जरूर चाकचौबंद किया है, पर पुलिसकर्मी काम नहीं करते। दूसरी महिला ने उदाहरण दिया कि मेरे सामने से लुटेरे मेरी कार उठाकर ले गए। मैंने 100 नंबर पर फोन किया, पुलिस आ गई और कागजी खानापूरी कर मामले को निपटा दिया।

महिला डिग्री कॉलेज की एक प्रोफेसर ने बताया कि लड़कियों को कॉलेज से आने—जाने में दिक्कत होती है। शोहदे उन्हें परेशान करते हैं। मेरठ में भी इस्माइल डिग्री कॉलेज की प्राचार्य ने कहा था कि हमें तीन बजे तक छात्राओं को कॉलेज से विदा कर देना होता है, ताकि वे दिन ढलने से पहले अपने गांव तक पहुंच सकें। उत्तर प्रदेश के सभी दरमियानी शहरों की यह दिक्कत है।

क्या यह सब इसी सरकार के शासनकाल में शुरू हुआ है? जवाब मिला, ‘नहीं।’ उत्तर प्रदेश में महिलाओं की स्थिति हमेशा से ऐसी ही रही है। इसका किसी की हुकूमत से मतलब नहीं है। इस सरकार ने महिला हेल्पलाइन जैसे काम शुरू किए हैं, पर पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव की जरूरत है।फिरोजाबाद औद्योगिक शहर होने के साथ मिश्रित आबादी वाला शहर है। यहां भी मेरठ की तरह अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों ने शिकायत की कि हमारे इलाकों में स्कूल, डिस्पेंसरी, एटीएम जैसी सुविधाएं नदारद हैं। 

मैंने पूछा कि पुराने हिंदू मोहल्लों में ऐसा ही है? जवाब मिला, ‘वहां हालात बेहतर हैं।’ उत्तर देने वाले हिंदू थे।
श्रमिक वर्ग के हालात यहां भी दयनीय हैं। तपेदिक (टीबी) के मामले में यह शहर हमेशा से बदनाम रहा है। कभी राजरोग कही जाने वाली इस बीमारी के सर्वाधिक शिकार श्रमिक और उनके परिजन हुआ करते थे। कूड़े के ढेर और बजबजाती नालियों के बीच कुकुरमुत्ते की तरह उगाई झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को देखकर किसी का भी मन द्रवित हो सकता है। इसके लिए आपको गलियों में भटकने की जरूरत नहीं है। सिर्फ किसी ट्रेन में बैठकर इस शहर को पार कीजिए, पटरी के दोनों तरफ ‘दरिद्रता’ का महासागर फैला हुआ नजर आ जाएगा। अफसोस की बात यह है कि किसी भी नेता की नजर इन पर नहीं जाती, पर वहां इस रंज को कम कर देने वाला एक उदाहरण देखने को मिला।

कुछ धनी—मानी व्यक्तियों ने यहां ‘ट्रॉमा सेंटर’ की शुरुआत की। सिर्फ 50 रुपये के शुल्क पर विशेषज्ञता प्राप्त डॉक्टर यहां मरीजों को परामर्श देते हैं। सीटी स्कैन, पैथोलॉजी और एक्स—रे जैसी सुविधाएं बाजार से आधी से भी कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इसी तरह दवाएं भी बेहद किफायती दर पर दी जाती हैं। सैकड़ों लोगों की भीड़ के बीच जिस तरह डॉक्टर शांत चित होकर लोगों का इलाज कर रहे थे, उससे एक उम्मीद जगी।

गरीबों की हालत हर जगह ऐसी है। शहर के मध्यवर्ग की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नहीं है। पुराना शहर हमेशा से गंदा था जो अब एक बेतरतीब दोजख में तब्दील हो गया है। भीड़, ट्रैफिक जाम, तरह-तरह का प्रदूषण और ऊपर से पेयजल की किल्लत। लोगों की शिकायत थी कि जेड़ा झील से पानी लाने का वादा हर चुनाव में उछाला जाता है। फिर अगले मतदान तक भुला दिया जाता है।

बगल में आगरा है, जहां कभी अंबेडकर से प्रेरित धर्म परिवर्तन हुए और आज बहुजन समाज पार्टी एक स्थापित शक्ति है। मुकाबला इस क्षेत्र में भी त्रिकोणीय है इसलिए मुस्लिमों, अगड़ों व तटस्थ नौजवानों की भूमिका फैसलाकुन होगी। कल आपको अलीगढ़ ले चलूंगा। एक ऐसा शहर, जो कभी दंगों की आग में झुलसता है तो कभी बारिश के पानी में डूबता है, पर कभी हिम्मत नहीं हारता। 


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shashi.shekhar@livehindustan.com

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  • Web Title:the ray of hope in the city of tuberculosis