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मणिपुर हमले के तुरंत बाद बनी मुंहतोड़ जवाब की रणनीति

भारतीय सेना ने 4 जून को मणिपुर में उग्रवादी हमले के चंद घंटे बाद ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में म्यांमार में घुसकर मुंहतोड़ जवाब देने की रणनीति बना ली थी। 7 जून की रात पीएम नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश से लौटने के बाद इसे मंजूरी दी। इस अभियान में दोनों देशों के बीच तालमेल का जिम्मा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को सौंपा गया था।

हमला अगले ही दिन करने की मंशा थी: सूत्रों के मुताबिक 4 जून को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मणिपुर हमले के बाद दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। इसमें रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, अजीत डोभाल और सेना प्रमुख दलबीर सुहाग शामिल थे। इसमें चर्चा की गई कि उग्रवादी शिविर पर अगले दिन ही हमला होना चाहिए।
 
फिर तय हुआ सोमवार का दिन: सेना प्रमुख दलबीर सुहाग ने इतने कम समय में हमला करने में अपनी अक्षमता जताई। फिर सोमवार का दिन तय हुआ। बैठक में सेना के साथ हवाई हमले के विकल्पों पर भी बात हुई थी। मगर इसे ठुकरा दिया गया क्योंकि इसमें ज्यादा क्षति की संभावना थी।
 
तो और ऑपरेशन होंगे

40 मिनट में ऑपरेशन पूरा कर लौट आए कमांडो

सेना ने प्लान-बी भी बनाया था
- वायुसेना के एमआई 17 हेलीकॉप्टरों को तैयार रखा गया था ताकि स्थिति बिगड़े तो इन कमांडो को वहां से तुरंत निकाला जा सके
- ये विशेष कमांडो दोनों हाथों से फायरिंग करने, तीन दिन बिना सोए अभियान चलाने, बम निष्क्रिय करने के कामों में पारंगत होते हैं

उग्रवादियों को ऐसे मार गिराया
- हेलीकॉप्टर से म्यांमार सीमा के पास उतारे गए
- दो दलों में बंटकर जंगल में पांच किमी पैदल चले
- एक दल ने सीधे हमला किया, दूसरे ने घेरा बनाया
- रॉकेट लांचर और ग्रेनेड से हमला बोल दिया

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  • Web Title:मणिपुर हमले के तुरंत बाद बनी मुंहतोड़ जवाब की रणनीति