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घोषणापत्र में मुफ्त देने का वादा नहीं कर पाएंगी पार्टियां

राजनीतिक दल अब अनाप-शनाप चुनावी वादे नहीं कर पाएंगे। उन्हें यह भी विस्तार से बताना पड़ेगा कि ये वादे कैसे पूरे होंगे और इनके लिए पैसों का इंतजाम कहां से होगा। आयोग के ये निर्देश बिहार विधानसभा चुनाव से लागू होगा। सबसे खास बात राजनीतिक दल मुफ्त उपहार और वस्तुएं देने का वादा नहीं कर पाएंगे।

निर्वाचन आयोग ने चुनाव से पूर्व जारी होने वाले राजनीतिक दलों के चुनाव घोषणापत्रों को आदर्श चुनाव आचार संहिता के दायरे में ले लिया है। आयोग ने सभी दलों को निर्देश दिया है कि अपने घोषणापत्रों की प्रति निर्वाचन आयोग को आवश्यक रूप से भेजें। आयोग ने कहा कि मतदाताओं का विश्वास उन्हीं वादों पर हासिल किया जाना चाहिए जिन्हें पूरा किया जाना संभव हो। आयोग ने दलों को यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दिए गए आदेशों के बाद हाल ही में जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने घोषणापत्रों को अपवाद के रूप में आचार संहिता के दायरे में लाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि घोषणापत्र चुनाव से पहले जारी किए जाते हैं, जिससे ये आचार संहिता के दायरे में नहीं आते। लेकिन इनमें किए गए वादे चुनाव के मैदान का संतुलन बिगाड़ते हैं। कोर्ट ने आयोग को इस बारे में दिशानिर्देश बनाने का आदेश दिया था।

इसके बाद आयोग ने सभी दलों से लंबा विचार-विमर्श किया और विस्तृत दिशानिर्देश तैयार किए। कुछ दलों ने इसका विरोध किया था और कहा था कि वोटरों से वादे करना और प्रस्ताव रखना उनका अधिकार है। लेकिन आयोग का मानना था कि वह निष्पक्ष चुनाव और सबको समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

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