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ब्लडप्रेशर की जांच

ब्लड प्रेशर तेजी से फैल रहा है। जैसे-जैसे हमने जीने के तौर-तरीके बदले हैं, उच्च रक्तदाब आधुनिकता का अंग बन हमारे जीवन में शामिल हो गया है। ऐसे में ब्लड प्रेशर को साधकर रखना जरूरी है। इसके बढ़े रहने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है। इससे उबरने के लिए जहां जीवनशैली में सुधार जरूरी हैं, वहीं दवा और ब्लड प्रेशर पर निगरानी भी अनिवार्य है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि ब्लड प्रेशर मापने के कुछ नियम हैं, जिन पर ध्यान न देने से ब्लड प्रेशर गलत पढ़ा जा सकता है। अत: जब भी रक्तदाब की जांच कराएं, ये सावधानियां जरूर अमल में लाएं:

पहले आराम फिर जांच : डॉक्टर के पास पहुंचने के बाद कम-से-कम 5 मिनट के लिए आराम करें, उसके बाद ही अपना रक्तदाब दिखाएं। कह दूर से चलकर आने, सीढ़ियां चढ़ने, दौड़ने-भागने के बाद तुरंत जांच कराते हैं तो रक्तदाब बढ़ा हुआ होगा। जांच के समय कुर्सी से टेक लगाकर आराम से बैठें। पैर जमीन पर रखें। आपकी बांह और रक्तदाब मापक-यंत्र आपके दिल जितनी ऊंचाई पर होना चाहिए। वरना रीडिंग गलत ही आएगी।  

कोला और कैफीन वर्जित : जांच के 30 मिनट पहले से चाय, कॉफी, कोला ड्रिंक और धूम्रपान वर्जित हैं। इनके सेवन से रक्तदाब अगले 15-20 मिनट के लिए बढ़ जाता है।

सही यंत्र जरूरी : रक्तदाब मापक-यंत्र के बांह पर बांधे जानेवाले कफ की चौड़ाई बांह की मोटाई के हिसाब से होनी चाहिए। कफ इतना चौड़ा हो कि बांह का 80 प्रतिशत घेरा उसमें आ जाए। बांह मोटी होने पर साधारण कफ से रक्तदाब लेने पर ब्लड प्रेशर की रीडिंग बढ़ी हुई होगी। यदि बांह पतली और कफ बड़ा है तो ठीक उलट होगा, रक्तदाब कम नपेगा। रक्तचाप मापने के लिए हमेशा जांचा-परखा यंत्र ही प्रयोग में लाएं। जिस यंत्र का प्रयोग करें, उसकी विश्वसनीयता की पुष्टि डॉक्टर से कर लें।

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