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मिर्गी का रोग

मिर्गी यानी एपिलेप्सी में रोज सात-आठ घंटे की नींद जरूर लें। समय से सोएं और जागें। खुद को जरूरत से ज्यादा थकाना ठीक नहीं। देर रात तक जगने और आराम के प्रति लापरवाही बरतने से दौरे का अंदेशा बढ़ जाता है। 

भारतीय जन-जीवन में व्रत-उपवास का अपना विशेष महत्व है। लेकिन मिर्गी के होते इस चक्कर में पड़ना ठीक नहीं। देर तक भोजन न करने से हमारे खून में ग्लुकोज कम हो जाता है, जिससे मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। शराब न पिएं। देर तक टेलीविजन देखने, कम्प्यूटर पर काम करने, और टिमटिमाती रोशनी या निओन साइन की ओर देखने से दौरा पड़ने का अंदेशा रहता है। इन स्थितियों से बचकर रहें।  

अप्रिय ध्वनियों से बचें। कुछ लोगों में संगीत के कुछ खास स्वर और ध्वनियां सुनते ही मिर्गी का दौरा पड़ता है। ड्राइविंग न करें तो बेहतर। जब दो साल तक लगातार एक भी दौरा न पड़े, तब ड्राइविंग शुरू की जा सकती है। तैराकी, नाव चलाना, साइकिल चलाना और पर्वतारोहण उसका आनंद दर्शक बनकर ही उठाएं, खिलाड़ी बनकर नहीं।

मिर्गी होने पर सामान्य गृहस्थ जीवन में कोई अड़चन नहीं आती, पर यह सोचना गलत है कि विवाह होने पर अपने से रोग दूर हो जाएगा। विवाह सूत्र में बंधने से पहले दूसरे पक्ष को अपने रोग के बारे में बता देना ही वाजिब है। विवाह के बाद अचानक दवा बंद करना बिल्कुल नासमङी है, चूंकि रोग इससे बेकाबू हो सकता है। मिर्गी की दवा चल रही हो तो माँ बनने का मन बनाने से पहले डॉक्टर से राय लेनी जरूरी है। 

कोई अन्य दवा लेने से पहले डॉक्टर से पूछें। कुछ अंग्रेजी दवाएं भी मिर्गीरोधक दवाओं से मेल नहीं खातीं। उन्हें लेने से मिर्गीरोधक दवा का असर कमजोर हो जाता है जिससे दौरे फिर से पड़ने लगते हैं। इस स्थिति से बचे रहने के लिए यह जरूरी है कि कोई भी नई दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर से यह पूछ लें।

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