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मंगल का सच, इसरो के इरादे

क्या मंगल पर पृथ्वी जैसा ही बड़ा महासागर है, क्या वहाँ किसी रूप में जीवन है और क्या मनुष्य कभी मंगल पर जाकर स्थायी रूप से रह सकेंगे। इन सब सवालों का जवाब अभी मिलना बाकी है। मंगल ग्रह के प्रति मनुष्य का आकर्षण अत्यंत प्राचीनकाल से ही रहा है। प्राचीन रोमवासियों ने मंगल को युद्ध का देवता माना है। अनेक विदेशी वैज्ञानिकों ने इसे पृथ्वी का सहोदर कहा है।

प्राय: ऐसी कल्पना की जाती रही है कि मंगल पर किसी न किसी रूप में जीवन विद्यमान है। वहीं कई वैज्ञानिक आधारों ने इस बात को पुख्ता आधार प्रदान किया है। हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि मंगल ग्रह का वातावरण और वहां का तापमान इंसानों के रहने के लिए अनुकूल है। आने वाले दिनों में मंगल ग्रह पर जीवन की खोज का काम और तेज हो जाएगा। इसरो भी मंगल ग्रह के लिए यान भेजने की तैयारी कर रहा है। इसरो के अध्यक्ष राधाकृष्णन का कहना है कि मानव बस्ती बनाने के लिहाज से मंगल एकदम फिट है। उन्होंने कहा कि 2030 तक मंगल पर बस्ती बनाने के कार्यक्रम में इसरो भी शामिल होगा और इसके लिए उसने अकेले ही तैयारी शुरू कर दी है।

नासा के मिशन का अंत
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह पर मौजूद रेत के टीले में दबे पड़े लैंड रोवर स्पिरिट को बाहर निकाल पाने में असमर्थता जताई है। करीब छह साल पहले दो प्रमुख रोवर मिशन स्पिरिट और आपर्च्युनिटी ने मंगल पर छह वर्ष पहले कदम पर रखा था। मौजूदा समय तक नासा मंगल मिशन पर 900 मिलियन डॉलर खर्च कर चुका है।

मंगल पर जीवन
मंगल ग्रह के प्रति मनुष्य की रुचि विगत सैकड़ों वर्षो से रही है। मंगल ग्रह के रहस्यों को जानने के लिए वायुमंडल से बाहर जाकर ग्रहों के अध्ययन की शुरुआत सोवियत रूस के अंतग्रही अंतरिक्ष यान मार्स-1 के द्वारा की गई जिसे 1 नवंबर, 1962 को छोड़ा गया। उसके बाद अमेरिका ने 1965 में मैरीनर-4 छोड़ा जिसने मंगल के पास से गुजरते हुए उसके कुछ चित्र खींचे। अमेरिका ने 13 नवंबर, 1971 को मैरीनर-9 को मंगल के गिर्द एक कक्षा में स्थापित किया। सोवियत संघ ने मार्स-3 नामक अपने अंतग्र्रही यान को 2 दिसंबर, 1971 को मंगल ग्रह पर उतार दिया। 1971 में अमेरिका ने अपने यान वाइकिंग प्रथम के एक मॉडय़ूल को मंगल पर उतारकर उस लाल ग्रह की धरती का विशेष अध्ययन किया। वाइकिंग ऑर्बटिर ने इस बात की जानकारी दी कि मंगल पर लिक्विड वाटर मौजूद है।

उपन्यासों और भारतीय ग्रंथों में जिक्र
अंग्रेजी के प्रसिद्ध उपन्यासकार जोनाथन स्विफ्ट ने अत्यंत लोकप्रिय उपन्यास गुलिवर्स ट्रेवल्स में मंगल ग्रह के दो उपग्रहों का उल्लेख किया है। उसने इन उपग्रहों की दूरी का जो अनुमान लगाया था, वह भी काफी हद तक सही निकला। लेखक ने इतना सही अनुमान कैसे किया यह भी एक रहस्य है। अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड टेन्निसन ने एक स्थान पर लिखा है कि मंगल चंद्रमा से विहीन बर्फ से ढंका हुआ ध्रुव है। 1877 में एफस हॉल ने वाशिंगटन ने 26 इंची दूरबीन से मंगल के दो छोटे उपग्रह फोबोस और डिमास की खोज की थी। प्राचीन भारतीय ग्रंथ ब्रह्मावैवर्त्यपुराण में मंगल को पृथ्वी-पुत्र कहा गया है।

मंगल की खासियत
मंगल, सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है। पृथ्वी से देखने पर, इसको इसकी रक्तिम आभा के कारण लाल ग्रह  के रूप में भी जाना जाता है। मंगल ग्रह का धरातल स्थलीय और वातावरण विरल है। इसकी सतह देखने पर चंद्रमा के गर्त और पृथ्वी के ज्वालामुखियों, घाटियों, रेगिस्तान और ध्रुवीय बर्फीली चोटियों की याद दिलाती है। यह स्थान है ओलम्पस मोंस का जो हमारे सौरमंडल का सबसे अधिक ऊँचा पर्वत है साथ ही विशालतम घाटी वैलेस मैरीनेरिस भी यहीं पर स्थित है। अपनी भौगोलिक विशेषताओं के अलावा मंगल का घूर्णन काल और मौसमी चक्र पृथ्वी के समान हैं।

सन् 1965 में मेरिनर 4 के द्वारा की पहली मंगल उड़ान से पहले तक यह माना जाता था कि ग्रह की सतह पर तरल अवस्था में जल हो सकता है। यह हल्के और गहरे रंग के धब्बों की आवर्तिक सूचनाओं पर आधारित था, विशेष तौर पर ध्रुवीय अक्षांशों, जो लंबे होने पर समुद्र और महाद्वीपों की तरह दिखते हैं। इन सीधी रेखाओं की मौजूदगी बाद में सिद्ध नहीं हो पाई और ये माना गया कि ये रेखायें मात्र प्रकाशीय भ्रम के अलावा कुछ और नहीं हैं। फिर भी, सौर मंडल के सभी ग्रहों में हमारी पृथ्वी के अलावा मंगल ग्रह पर जीवन और पानी होने की संभावना सबसे अधिक है।

मिशन अब तक
मंगल पर दो रोवर्स (स्पिरिट और अपॉच्र्युनिटी), लैंडर फीनिक्स के साथ ही कई निष्क्रिय रोवर्स और लैंडर हैं जो या तो असफल हो गये हैं या उनका अभियान पूरा हो गया है। इनके या इनके पूर्ववर्ती अभियानों द्वारा जुटाये गये भूवैज्ञानिक सबूत इस ओर इंगित करते हैं कि कभी मंगल ग्रह पर बड़े पैमाने पर पानी की उपस्थिति थी, साथ ही इन्होंने ये संकेत भी दिये हैं कि हाल के वर्षो में छोटे गर्म पानी के फव्वारे यहां फूटे हैं। नासा के मार्स ग्लोबल सर्वेयर की खोजों द्वारा इस बात के प्रमाण मिले थे कि दक्षिणी ध्रुवीय बर्फीली चोटियाँ घट रही हैं।

मंगल के चंद्रमा
मंगल के दो चन्द्रमा, फोबोस और डिमोज हैं, जो छोटे और अनियमित आकार के हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह 5261 यूरेका के समान, क्षुद्रग्रह है जो मंगल के गुरुत्व के कारण यहां फंस गए हैं। मंगल को पृथ्वी से नंगी आँखों से देखा जा सकता है। इसका आभासी परिमाण -2.9 तक पहुँच सकता है और यह चमक सिर्फ शुक्र, चन्द्रमा और सूर्य के द्वारा ही पार की जा सकती है, यद्यपि अधिकांश समय बृहस्पति, मंगल की तुलना में नंगी आँखों को अधिक उज्ज्वल दिखाई देता है।

भौगोलिक स्थिति
मंगल की भौगोलिक स्थिति काफी अच्छी है। गर्मियों में यहाँ सबसे ज्यादा तापमान होता है, -27 डिग्री सेल्सियस और जाड़े में यह, -133 डिग्री तक चला जाता है। मंगल पर सौर परिवार का सबसे बड़ा पर्वत है़, तो यहां घाटियां इतनी बड़ी हैं कि अगर यह पृथ्वी पर होती, तो यह न्यूयॉर्क से लांस एंजिल्स तक फैला होता। प्रकृति के इन अजूबों के साथ-साथ मंगल पर एक दिन में अतिरिक्त 37 मिनट भी होते हैं। मंगल पर एक साल पृथ्वी के 687 दिनों के बराबर है।

बहरहाल, 1960 के दशक में पहली बार अंतरिक्ष यान यहां उतरा था, पर 1990 के आखिर तक मंगल के सतह की पूरी तस्वीर खींची जा चुकी थी। मंगल का वातावरण पृथ्वी की तुलना में पतला है और इसमें सबसे बड़ा हिस्सा है कार्बन डाइ ऑक्साइड का़, ऑक्सीजन इसमें सिर्फ 0.13 फीसदी ही है।

गुरुत्वाकर्षण कम
मंगल ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण भी पृथ्वी के मुकाबले काफी कम है़ लेकिन इन सभी अंतरों के बावजूद मंगल सौर परिवार में किसी अन्य ग्रह की तुलना में काफी कुछ पृथ्वी जैसा ही है। यही कारण है कि मंगल ग्रह पर अभियान तेज होने लगे हैं और यहाँ जीवन की तलाश की जा रही है़ अभी भी मंगल ग्रह के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि जितनी भी जानकारी अभी है, वो कम है।

anurag.mishra@livehindustan.com

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