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फिल्मों और कहानियों में मंगल

मंगल ग्रह पर चूंकि जीवन का अंदेशा जब-तब जाहिर किया गया है, इसलिए यह विज्ञान कथा लेखकों और फिल्मकारों का भी प्रिय विषय रहा है। कई फिल्में और कहानियां मंगल ग्रह पर बनाई और लिखी गई हैं। ये बात है सन् 1938 की, जिस समय अमेरिका में भी टीवी के बजाय रेडियो अधिक लोकप्रिय था। अमेरिका के मर्करी थियेटर के मशहूर कलाकार ओर्सन वैलेस ने रेडियो पर एक नाटक का अपनी भारी-भरकम आवाज में वाचन किया।

नाटक का नाम था ‘दि वार ऑफ द वर्ल्ड्स’ जो मूल रूप से विज्ञान कथा लेखक एच.जी. वेल्स का लिखा उपन्यास था, जिसकी कहानी में मंगलवासियों द्वारा पृथ्वी पर आक्रमण किया जाता है। वैलेस का वह रेडियो वाचन कुछ इतना सजीव था कि एकबारगी समूचा अमेरिका उसे सुन कर कांप उठा था और लोग सचमुच यह सोच बैठे थे कि मंगलवासियों का आक्रमण हो गया है। ओर्सन वैलेस इस रेडियो वाचन के बाद समूचे अमेरिका में एक जाना-माना नाम बन गए थे जिन्हें बाद में बतौर अभिनेता और फिल्मकार विश्वख्याति मिली।

इसके अलावा, जाने-माने विज्ञान कथा लेखक रे ब्रैडबरी ने भी ‘दि मार्शियन क्रॉनिकल्स’ नामक पुस्तक में मंगल ग्रह को आधार बनाकर कई विज्ञान कथाएं लिखी हैं जिन पर फिल्म बन चुकी है। एक दशक पूर्व ‘मार्स अटैक्स’ नामक फिल्म भी आई थी जिसमें मंगलवासी पृथ्वी पर कब्जा करने के लिए हमला बोलते हैं, लेकिन पराजित होते हैं। इस श्रेणी में ‘मिशन टू मार्स’ खासी सराही गई थी जिसमें मंगल ग्रह पर पहले मानव मिशन की कहानी दर्शाई गई थी जो दुर्घटना का शिकार होता है।

यों रेड प्लेनेट यानी मंगल पर वैज्ञानिक जीवन होने की बातें बहुत पहले से करते रहे हैं। उन्नीसवीं सदी में इतालवी खगोलविद् जियोवन्नी शियापारेली ने पहली बार मंगल की सतह का नक्शा तैयार किया था। उसके बाद कई वैज्ञानिक और विज्ञान कथा लेखक इस विषय पर अपनी-अपनी खोज के साथ कलम चलाते रहे। मंगल पर जीवन होने की परिकल्पनाएं कुछ इतनी रोचक थीं कि बीसवीं सदी के पहले पचास वर्ष इस पर खूब बहस-मुबाहिसे चले और 1960 के बाद से अंतरिक्ष में मानव के चरण पड़ने के बाद से ही इसके संबंध में कुछ तथ्यात्मक जानकारियां सामने आई।

सन् 1953 में ही मंगल पर फिल्म बनी थी ‘इनवेडर्स फ्रॉम मार्स’। मशहूर कॉमिक बुक पात्र टाजर्न के रचयिता एडगर राइस बरोज़ ने मंगल को ही एक काल्पनिक नाम दिया था ‘बारसूम’ और शुक्र यानी वीनस को अपनी कहानियों में ‘एम्टर’ कहा था। उनकी कहानियों के पात्र जॉन कार्टर मंगल यानी बारसूम पर पहुंचते हैं और वहां उनके कई रोचक कारनामों को भी अब एक फिल्म में ‘जॉन कार्टर ऑफ मार्स’ में दिखाया जाएगा। कई कहानियों और फिल्मों में पृथ्वी के कई पात्रों को मंगल पर इसलिए भी पहुंचते हुए दिखा जाता है क्योंकि वैज्ञानिक मंगल को पृथ्वी का जुड़वां भाई मानते हैं। इसके बावजूद, कथा साहित्य और फिल्मों के लिए मंगल को उसके नाम के अनुसार हमेशा शुभ ही माना गया है।

sandeep.joshi@livehindustan.com

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