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शहरीकरण के साथ सुविधाएं बढ़ाइए

लाइव हिन्दुस्तान टीम
Sat, 09 Apr 2011 10:40 PM
शहरीकरण के साथ सुविधाएं बढ़ाइए

देश की आबादी के दो रुझान स्पष्ट हैं। पहला यह कि शहरों की आबादी बढ़ रही है और दूसरा यह कि युवाओं की आबादी बढ़ रही है। दूसरे रुझान का संबंध भी शहरीकरण से ही है, क्योंकि युवा को अंतत: शहरों की ओर ही आना है।

आजादी के बाद लगातार शहरीकरण बढ़ रहा है। गांवों से आबादी का बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। 1991 की जनगणना के वक्त यह 27 प्रतिशत था तो 2001 में 29 प्रतिशत हो गया था। इस बार यह और बढ़ गया है। हमें यह बहुत ज्यादा दिखाई देता है, लेकिन विकास के लिए यह आवश्यक है। जो भी देश अमीर हैं, विकसित हैं, वहां शहरी आबादी का प्रतिशत 70-90 प्रतिशत तक है।

देश के आर्थिक विकास में शहरों का योगदान भी ज्यादा होता है। पश्चिम की तुलना में हमारे यहां आज भी शहरी आबादी 30-35 प्रतिशत ही है। हमें वह बहुत ज्यादा इसलिए दिखाई पड़ती है, क्योंकि हमारे यहां शहरीकरण तो हो गया, लेकिन उस अनुपात में सुविधाएं नहीं बढ़ीं, आधारभूत संरचना का विकास नहीं हुआ। 

बिजली-पानी, सैनिटेशन, परिवहन और सड़कों की उचित व्यवस्था नहीं है। ग्लोबलाइजेशन के साथ शहरीकरण तो बढ़ना ही है, साथ ही गांवों से आबादी का पलायन भी बढ़ना ही है। यह रफ्तार और बढ़ेगी। इसलिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि आने वाले समय में हमारी सरकार को बुनियादी संरचना खड़ी करनी होगी, जनता को मूलभूत सुविधाएं देनी होंगी। 

चूंकि शहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ निजी क्षेत्र को मिलेगा, इसलिए उसकी भूमिका भी महत्त्वपूर्ण होगी। यदि बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर हम कामयाब हो गए तो हम टिकाऊ आबादी विकास को प्राप्त कर लेंगे।

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