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छाया रहेगा माउस का मैजिक

कंप्यूटर माउस की आयु 40 वर्ष के करीब हो चुकी है। 40 वर्ष पहले सेन फ्रांसिस्को में नेटवर्क कंप्यूटर सिस्टम के प्रदर्शन के दौरान डग एंजेलबर्ट ने पहली बार माउस को पेश किया था। कंप्यूटर की दुनिया सबसे उम्दा खोजों में से एक माउस को यह नाम किसने दिया, इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है। एजेंलबर्ट ने एक बार माउस के बारे में कहा था कि यह तेज है और इसकी सहायता से लोग गलतियां कम करते हैं। वर्षो तक माउस की कंप्यूटर को नियंत्रित करने वाली दुनिया में बादशाहत कायम रही। इतने लंबे सफर में माउस ने कई पड़ाव देखे। 

साधारण से कंप्यूटर कंट्रोलर माउस से ऑप्टिकल माउस, इंफ्रारेड सेंसर माउस आदि। इसके साधारण इस्तेमाल और आसानी से प्रयोग होने के कारण यह तकनीक की दुनिया का नियंत्रक बन गया। यहां तक कि अखबारों से लेकर हर जगह एक ही बात कही जाने लगी, ‘बस एक माउस के क्लिक करते ही’ यानी दुनिया के हर प्रश्न का जवाब दिलाने वाला यंत्र, लेकिन तकनीक की बदलती तस्वीर के साथ माउस पिछड़ने लगा। हार्डवेयर निर्माताओं और सॉफ्टवेयर डेवलपरों ने टेक्नोलॉजी और लोगों के बीच संवाद के लिए नए उपाय खोजने शुरू कर दिए। 

कंप्यूटर की दुनिया के जानकार कहते हैं कि कंप्यूटर की अलादीनी चिराग सरीखी डिवाइस अगले दशक तक डिजिटल दुनिया की आंधी में खो जाएगी क्योंकि आने वाले समय में टचस्क्रीन सरीखी तकनीक कंप्यूटर माउस का मर्सिया लिख सकती है। आज हम ऐसी ही कुछ तकनीक के बारे में चर्चा करेंगे जो इस बात का संकेत दे रहे हैं कि जल्द ही यह सूत्र वाक्य बदल जाएगा कि ‘बस एक माउस के क्लिक से’।

एप्पल का नया माउस
एप्पल बाजार में जो अपना नया माउस लाने जा रहा है, उसमें स्क्रॉल व्हील को हटा दिया गया है। यहीं नहीं, आप वेब पेज को और फोटोग्राफ का नेविगेशन माउस पर अपनी अंगुलियों को फिराकर कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर आपको वेब पेज को स्क्रॉल करने के लिए आपको सिर्फ अंगुलियों का इशारा करना होगा इसके लिए आपको व्हील की भी जरूरत नहीं होगी। इसी तरह पन्ने को जूम करने के लिए आपको कंट्रोल का बटन दबाकर अपनी अंगुली से स्क्रालिंग का भाव दिखाना होगा।

माउस के प्रकार
मैकेनिकल माउस डिवाइस : सन् 1972 में जीरोक्स पीएआरसी ने बॉल माउस खोजा। इसमें बाहरी पहियों को बॉल माउस से बदल दिया गया जिसको किसी भी दिशा में बदला जा सकता है। दूसरी तरह के मैकेनिकल माउस में इनकोडर व्हील की जगह पोटेंशियोमीटर का प्रयोग होता था।

ऑप्टिकल माउस
ऑप्टिकल माउस में लाइट एमिटिंग डायोड और फोटो डायोड का प्रयोग होता है। शुरुआती ऑप्टिकल माउस का प्रदर्शन दो स्वतंत्र खोजकर्ताओं ने 1980 में की थी। उस दौरान ये दो तरह के थे। इसमें से एक को एमआईटी के स्टीव क्रिश और माउस सिस्टम कार्पोरेशन ने खोजा था। इसमें इन्फ्रारेड एलईडी का प्रयोग होता था। दूसरे माउस का आविष्कार रिचर्ड एफ. लायन ने किया था।

इस तरह के माउस का तरीका अलग था। क्रिश के माउस में एक्स-वाई कोऑर्डिनेट सिस्टम पैड में लगे हुए थे। ये तब सही तरीके से काम नहीं करते थे, जब पैड को घुमाया जाता था जबकि लायन माउस में माउस बॉडी में एक्स-वाई को-ऑर्डिनेट का सिस्टम प्रयोग किया जाता था। नए जमाने के ऑप्टिकल माउस पहले की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस हो गए और इनकी क्षमताएं बेहतर हो गई।
लेजर माउस : लेजर माउस में इन्फ्रारेड लेजर डायोड का इस्तेमाल होता था।

ऑप्टिकल माउस के रंग
ऑप्टिकल माउस के लाइट एमिटिंग डायोड के रंग अलग-अलग होते हैं लेकिन इसमें सबसे आम रंग लाल है। चूंकि लाल रंग का डायोड सस्ता होता है और सबसे प्रमुख कि सिलिकॉन लाल रंग के प्रति संवेदनशील होता है।

ऑप्टिकल बनिस्पत मैकेनिकल माउस
ऑप्टिकल माइस में किसी तरह का घुमाने वाला हिस्सा नहीं होता है जिसकी वजह से इसे मेंटीनेंस की जरूरत नहीं होती है। वहीं मैकेनिकल माउस की तरह उसमें कचरे जैसी दिक्कतें नहीं आती। वहीं कई मैकेनिकल माउस का ग्लॉसी और पारदर्शी सरफेस पर बेहतर तरीके से काम न कर पाना दिक्कत हुआ करता था।

ग्लास लेजर माउस : ग्लास लेजर माउस (ग्लेजर) की क्षमता लेजर माउस की तरह होती है। अगस्त, 2009 में लॉजिटेक ने दो लेजर के साथ माउस बाजार में उतारा।

इंशियल और जायरोस्कोप माउस : इसे एयर माउस कहा जाता है। इन्हें ऑपरेट करने के लिए किसी सरफेस की जरूरत नहीं होती। 

थ्रीडी माउस : इसे बैट, फ्लाइंग माउस के नाम से भी जाना जाता है। सामान्यत: ये डिवाइस अल्ट्रासाउंड के माध्यम से काम करती है।

टेक्टाइल माउस : वर्ष 2000 में लॉजिटेक ने टेक्टाइल माउस लांच किया जिसमें छोटे एक्यूटर लगे होते हैं जिसकी वजह से माउस बाइब्रेट करता है।

गेम में माउस का इस्तेमाल
माउस पर्सनल कंप्यूटर आधारित खेलों में इंटरफेस की तरह काम करता है।  कंप्यूटर खेलों और वीडियो गेम कंसोल में फर्स्ट पर्सन शूटर, इंवर्ट माउस सेटिंग, होम कंसोल माउस का प्रयोग होता है।

चेहरे और संकेत से होगा संचालन
डेवलपर ऐसे रास्ते को खोजने में लगे हैं कि किस तरह कुदरती हरकतों और भावों के द्वारा चीजों को नियंत्रित रखा जा सके। उदाहरण के लिए डिजिटल कैमरे को ही लें, कई कैमरों में आप फेस रिकोगनिशन, पलकें झपकाने और हंसी की पहचान के द्वारा उम्दा तस्वीरें लेते हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब आने वाले समय में आप टेलीविजन को रिमोट कंट्रोल के बजाय अपनी भाव-मुद्राओं के कारण संचालित कर पाएंगे। पेनासॉनिक बाजार में पहले ही प्रोटोटाइप होम एंटरटेनमेंट सिस्टम बना चुका है। बाजार में आने वाले कई लैपटॉप में इस बात की सुविधा उपलब्ध है कि वह सिर्फ आपके अंगूठे या अंगुली के संपर्क से ही खुले, इससे एक तरफ जहां पासवर्ड डालने और उसे हैक होने की चिकचिक से छुटकारा मिलेगा, तो कंप्यूटर पहले की तुलना में पहले की अपेक्षा सुरक्षित हो जाएंगे।

मनोभावों पर काम करेंगे कंप्यूटर
इससे ज्यादा आसान और क्या हो सकता है कि किसी कंप्यूटर या गैजेट को विचारों के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकें। हो सकता है कि सुनने में आपको यह विज्ञान की कोई गल्प लगे, लेकिन निर्माता ऐसी डिवाइस के निर्माण में लगे हैं जो आपके एक्शन के अनुरूप काम करेंगे। विदेशों में मिलने वाले इमोटिव एपॉक हैडसेट
खिलाड़ियों को यह सुविधा देते हैं कि वह विचारों, भाव-भंगिमाओं के द्वारा कंप्यूटर खेल में नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं।

माउस एसीसिरीज 
एंजेलबर्ट द्वारा खोजे गए पहले माउस में एक बटन था। एंजेलबर्ट के माउस में माउसपैड की जरूरत नहीं होती थी। उस दौरान माउस में दो पहिए लगे होते थे जो किसी भी सतह पर काम कर सकते थे। माउसपैड सबसे आम एसेसरीज है। हालांकि ज्यादातर ऑप्टिकल और लेजर माउस को पैड की जरूरत नहीं होती थी। माउस के फुट कवर में कम घर्षण या पॉलिशड प्लास्टिक लगा होता है। कुछ उच्च गुणवत्ता वाले माउस में घर्षण कम करने के लिए टेफ्लॉन लगा होता है।

anurag.mishra@livehindustan.com

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