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वैक्स कोटिंग

वैक्स कोटिंग फलों और सब्जियों को अधिक दिनों तक सुरक्षित रखने का आधुनिक तरीका है। इसका प्रयोग खासकर परिवहन के दौरान  फलों और सब्जियों को सड़ने और गलने से बचाने के लिए किया जाता है। इसमें एक प्रकार का एडीबल वैक्स यानी मोम होता है। छिलके सहित खाने वाले फलों और सब्जियों के उपर इस मोम की कोटिंग की जाती है। इससे लगभग दस दिनों तक फलों और सब्जियां सड़ती नहीं हैं। यह मोम स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता है।

कोटिंग करने के लिए एडीबल वैक्स की श्रेणी में ही आने वाला एक मैटीरियल सेंपरफ्रेश है, जिससे फलों और सब्जियों पर कोटिंग करने से इनकी ताजगी कई दिनों तक बनी रहती है। फलों और सब्जियों पर कोटिंग का यह तरीका कम खर्चीला भी है। खास बात यह है कि वैक्स कोटिंग किसी भी तरह के छिलके(मोटे हों या पतले) वाले फलों और सब्जियों पर की जा सकती है।

सेंपरफ्रेश से कोटिंग करने के लिए उसमें ओलिक एसिड और ट्राईइथेलॉल एमाइन मिलाया जाता है। अब इस घोल से फलों और सब्जियों पर स्प्रे किया जाता है। जबकि एडीबल वैक्स से  कोटिंग  के लिए सब्जियों को वैक्स में डुबाकर निकाल लिया जाता है और इसे छाया में सूखा लिया जाता है। वैक्स कोटिंग से सब्जियों पर जल्दी फफूंद नहीं लगती। हालांकि सेंपरफ्रेश से कोटिंग करने के बाद भी फलों और सब्जियों को छाया में सुखाना उतना ही जरूरी होता है। 
      
रखरखाव व परिवहन की असुविधा के कारण किसानों को होने वाले भारी नुकसान से बचने का यह बेहतर तरीका है। सेंपरफ्रेश और अन्य एडीबल वैक्स आसानी से बाजार में उपलब्ध होते हैं। फलों और सब्जियों पर वैक्स कोटिंग का खर्च लगभग 20 पैसे प्रति किलो पड़ता है।

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