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बुक बिल्डिंग

बुक बिल्डिंग एक प्रक्रिया है जिसके जरिए कोई कंपनी अपने शेयर का ऑफर प्राइज तय करती है। जब कंपनी अपने शेयर को लोगों के बीच ले जाती है तब बुक बिल्डिंग की जरूरत होती है। कंपनी जब स्टॉक एक्सचेंज में खुद को लिस्ट कराना चाहती है तो वह एक प्राइज बैंड निर्धारित करती है, जिसके लिए निवेशक शेयर की बोली लगाते हैं। निवेशक को यह स्पष्ट करना होता है कि वह कितने शेयर सबस्क्राइब करना चाहता है और प्रत्येक शेयर के लिए वह कितने मूल्य का भुगतान करना चाहेगा।
  
प्राइज बैंड में कम कीमत को फ्लोर प्राइज कहा जाता है और ऊपर वाली कीमत को सिलिंग प्राइज कहा जाता है। कंपनी जो कि लोगों के बीच जाना चाहती है वह एक अग्रणी मर्चेट बैंकर को नियुक्त करती है, जिसे बुक रनिंग लीड मैनेजर कहा जाता है, जो प्रॉस्पेक्टस तैयार करता है और उसे नियामक संस्था सेक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के पास फाइल कराता है।

जब प्राइज बैंड स्थायी होता है तो भावी निवेशकों को आमंत्रित किया जाता है कि वे कीमत तय करें। इस प्रक्रिया से शेयरों की मांग कितनी होगी, यह समझने में भी मदद मिलती है। यदि लीड मैनेजर को लगता है कि नीलामी की अधिक गुंजाइश नहीं है तो वह इसे रद्द भी कर सकता है।

विभिन्न कीमतों पर बोली का आकलन करने के बाद जारीकर्ता अंतिम कीमतों का निर्धारण करता है, जिस पर बिडिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेयरों को निवेशकों को जारी किया जाता है। इसको कट ऑफ प्राइज कहा जाता है। जो इसमें सफल रहते हैं उन्हें शेयरों का आबंटन कर दिया जाता है और शेष को उनकी राशि वापस कर दी जाती है।

यदि आप छोटे स्तर पर निवेश करते हैं तो आपको कम प्राइज बैंड पर बिड करना चाहिए। रिटेल इन्वेस्टर अधिकतम एक लाख रुपये का निवेश कर सकता है। अधिकतर कंपनियां रिटेल इन्वेस्टर को फ्लोर प्राइज पर 5 प्रतिशत का डिस्काउंट देती हैं।

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