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ईपीएफ

हर व्यक्ति रिटायरमेंट के बाद के जीवन को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना चाहता है, जिसमें उसकी मदद करते हैं ईपीएफ यानी कर्मचारी भविष्य निधि। अधिकतर कर्मचारियों के लिए यह अनैच्छिक बचत होती है, पर यह भी सच है कि इसके फायदे भी नजर आने लगते हैं।

कर्मचारी के बराबर राशि नियुक्तिकर्ता द्वारा जमा कराई जाती है और उस पर 8.5 प्रतिशत की दर से मिलने वाला रिटर्न इसे और आकर्षक बना देता है। उदाहरण के लिए यदि आपकी उम्र 25 साल है और आपका वेतन 20 हजार रुपये।

यह मानकर चलें कि ईपीएफ में 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है और हर साल आपके वेतन में 5 प्रतिशत की बचत होती है। ऐसे में यदि आप हर माह अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 प्रतिशत ईपीएफ में जमा कराते हैं और उतनी ही राशि आपके नियुक्तिकर्ता द्वारा जमा कराई जाती है, तो रिटायरमेंट के समय आपको 1.38 करोड़ रुपये मिलेंगे।

हालांकि वर्तमान स्वरूप में ईपीएफ का नकद और ट्रांसफर दो स्तर पर नुकसान देखने को मिलता है। नियम के अनुसार रिटायरमेंट के समय, चिकित्सकीय जरूरत और दो माह बेरोजगार रहने की स्थिति में आप ईपीएफ निकाल सकते हैं।

अधिकतर लोग अपनी पिछली नौकरी छोड़ने के दो महीने बाद ईपीएफ राशि को नए खाते में ट्रांसफर करने की जगह पैसा वापस निकलवा लेते हैं। नई कंपनी में उन्हें नया ईपीएफ एकाउंट मिल जाता है। ईपीएफ राशि निकलवाने की जगह उसे नए खाते में ट्रांसफर कराना अधिक उपयुक्त होता है।

कैसे करें ट्रांसफर: जैसे ही नई संस्था ज्वॉइन करें और आपको ईपीएफ ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। यह एक एल्फान्यूमेरिक डिजिट होती है, जिसके पहले दो अक्षर क्षेत्रीय पीएफ कार्यालय और अगले पांच अंक नियुक्तिकर्ता के कोड को बताते हैं, फिर कर्मचारी कोड लिखा होता है।
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