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प्लेटलेट्स

जीवित प्राणियों के खून का एक बड़ा हिस्सा प्लेटलेट्स (जिनमें लाल रक्त कणिकाएं और प्लाज्मा शामिल हैं) से निर्मित होता है। दिखने में ये नुकीले अंडाकार होते हैं और इनका आकार एक इंच का चार सौ हजारवां हिस्सा होता है। इसे माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। यह बोन मैरो में मौजूद सेल्स के काफी छोटे कण होते हैं, जिन्हें तकनीकी भाषा में मेगा कार्योसाइट्स कहा जाता है। ये थ्रोम्बोपीटिन हार्मोन की वजह से विभाजित होकर खून में समाहित होते हैं और सिर्फ 10 टिन तक संचारित होने के बाद स्वत: नष्ट हो जाते हैं। शरीर में थ्रोम्बोपीटिन का काम प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य बनाना होता है।

क्या करते हैं प्लेटलेट्स : खून में मौजूद प्लेटलेट्स का एक अहम काम हमारे शरीर में मौजूद हार्मोन और प्रोटीन उपलब्ध कराना होता है। खून की धमनी को नुकसान होने की सूरत में कोलाजन नामक द्रव निकलता है जिससे मिलकर प्लेटलेट्स एक अस्थाई दीवार का निर्माण करते हैं और खून की धमनी को और अधिक क्षति होने से रोकते हैं। शरीर में जरूरत से ज्यादा होना शरीर के लिए कई गंभीर खतरे उत्पन्न करता है। इससे खून का थक्का जमना शुरू हो जाता है जिससे दिल के दौरे की आशंका बढ़ जाती है। प्लेटलेट्स की संख्या में सामान्य से नीचे आने पर रक्तस्नव की आशंका बढ़ती है।

कब घटते हैं प्लेटलेट्स : खून में प्लेटलेट्स की संख्या किसी खास बीमारी या जेनेटिक गड़बड़ी की वजह से होती है। किसी इलाज या सजर्री की वजह से भी ऐसा होता है। अंग प्रत्यारोपण, झुलसने, मैरो ट्रांसप्लांट, दिल का ऑपरेशन या कीमोथेरेपी के बाद अकसर खून की जरूरत होती है। ऐसे में कई बार प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की भी जरूरत पड़ती है।

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