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जीआईएस

जीआईएस (जियोग्राफिक इनफॉरमेशन सिस्टम) हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर को एकीकृत करता है और भौगोलिक संदर्भ सूचनाओं के लिए डाटा एकत्र, मैनेज, विश्लेषित और डिस्प्ले करता है। जीआईएस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल वैज्ञानिक अनुसंधान, रिसोर्स मैनेजमेंट, असेट मैनेजमेंट, आर्कियोलॉजी, शहरीकरण, क्रिमिनोलॉजी में होता है। उदाहरण के तौर पर जीआईएस के मार्फत ये पता लगाया जा सकता है कि कौन से क्षेत्रों में प्रदूषण कम है। जीआईएस के माध्यम से आप डाटा को आसानी से समझ सकते हैं और शेयर कर सकते हैं।
सन् 1962 में कनाडा के ओंटेरियो में पहला जीआईएस बनाया गया। यह कनाडा के फेडरल डिपॉर्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट्री और रूरल डेवलपमेंट द्वारा बनाया गया था। इसका निर्माण डॉ. रॉजर टॉमलिसन ने किया था। इस सिस्टम को कनाडा ज्योग्राफिक इनफॉरमेशन सिस्टम कहा जाता है और इसका प्रयोग कनाडा लैंड इन्वेंटरी द्वारा डाटा एकत्रित और विश्लेषित किया जाता है। इसके माध्यम से कनाडा के ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन, कृषि, पानी, वाइल्डलाइफ आदि के बारे में जानकारी एकत्रित की जाती थी।
जीआईएस को मुख्यत: तीन तरीकों से देखा जा सकता है।
डाटाबेस :  यह डाटाबेस दुनिया भर का यूनिक तरीके का डाटाबेस होता है। एक तरह से यह भूज्ञान का इनफॉरमेशन
सिस्टम होता है। बुनियादी तौर पर कहा जाए तो जीआईएस मुख्यत: संरचनात्मक
डाटाबेस पर आधारित होता है, जो कि विश्व के बारे में भौगोलिक शब्दों के आधार पर बताता है।
मानचित्र : यह ऐसे नक्शों का समूह होता है जो पृथ्वी की सतह सबंधी बातें विस्तार से बताते है। 
मॉडल : यह इनफॉरमेशन ट्रांसफॉर्मेशन टूल्स का समूह होता है जिसके माध्यम से
मौजूदा डाटाबेस द्वारा नया डाटाबेस बनाया जाता है।

 

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