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सीबीएसई

हाल में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षाओं तक पूरे देश में गणित और विज्ञान की एक ही पढ़ाई लागू किए जाने का ऐलान किया है। पूरे देश में स्कूलों का सिलेबस केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा ही तय किए जाते हैं।

सीबीएसई की स्थापना विभिन्न चरणों में हुई थी। स्वतंत्रता पूर्व 1921 में यूपी बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन की स्थापना तत्कालीन सरकार ने की थी। उसके बाद 1929 में देश भर के लिए एक ही बोर्ड - बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन, राजपूताना की नींव रखी गई थी। इसके बाद शिक्षा के स्तर में कुछ सुधार हुआ, लेकिन इस बोर्ड की सीमाएं थीं।

अत: आजादी के बाद 1952 में बोर्ड के संविधान में व्यापक परिवर्तन किए गए और इसमें कई क्षेत्रों का विलय हुआ और इसे नाम मिला सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंड्री एजुकेशन। वर्ष 1962 में इसे पुनर्गठित किया गया जिसके पीछे शैक्षणिक संस्थानों को सुचारू रूप से चलाना और जिन अभिभावकों का नित तबादला होता है उनके बच्चों को सुविधाएं प्रदान किए जाने जैसे लक्ष्य थे।

सीबीएसई के अधिकार क्षेत्र में देश की भौगोलिक सीमा से बाहर के भी कुछ स्कूल आते हैं। वैसे पूरे देश में हजारों सरकारी स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों के अतिरिक्त 897 केंद्रीय विद्यालय, 480 जवाहर नवोदय विद्यालय और 14 सेंट्रल तिब्बतन स्कूल भी सीबीएसई के अधीन आते हैं। भारत से बाहर स्थित स्कूल दिल्ली स्थित सीबीएसई के दफ्तर के अधीन आते हैं।

बोर्ड के अन्य दफ्तर इलाहाबाद, अजमेर, चेन्नई, गुवाहाटी, पंचकुला, पटना और भुवनेश्वर में स्थित हैं। इस लिहाज से बोर्ड का विकेंद्रीकरण किया गया है। स्थानीय कार्यालय मुख्यालय के अधीन कार्य करते हैं, वैसे उन्हें व्यापक अधिकार दिए गए हैं। सीबीएसई एक स्वायत्त संस्था है और यह अपने खर्च के लिए केंद्र सरकार या किसी अन्य स्त्रोत पर आश्रित नहीं रहती।

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