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उत्तरी ध्रुव

आर्कटिक यानी उत्तरी ध्रुव को पृथ्वी की छत भी कहा जा सकता है। आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ से ढंके विशाल क्षेत्र के अतिरिक्त आर्कटिक सागर भी शामिल है। यह सागर अन्य कई देशों जैसे कनाडा, ग्रीनलैंड, रूस, अमेरिका, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड की जमीनों को छूता है। यह क्षेत्र आर्कटिक सर्कल भी कहलाता है क्योंकि वहां ‘मिडनाइट सन’ यानी अर्धरात्रि के सूर्य और ‘पोलर नाइट’ यानी ध्रुवीय रात का नजारा भी देखने को मिलता है।

आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ का विशाल सागर है जिसेअंध महासागर का उत्तरी छोर भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में वनस्पति बहुत कम मिलती है। यहां के सागर के पानी में कई तरह के प्लैंक्टन मिलते हैं। इसके अतिरिक्त, जमीन पर रहने वाले ध्रुवीय भालू और कुछ लोग भी यहां रहते हैं। इसके अनोखे भौगोलिक वातावरण के कारण यहां रहने वाले लोगों ने खुद को हालात के मुताबिक ढाल लिया है। गत कुछ दशकों में आर्कटिक क्षेत्र के बर्फीले सागर की बर्फ कम होनी शुरू हुई है।

यहां का मौसम सर्दियों में आमतौर पर शून्य से 40 डिग्री (सेल्सियस) तक नीचे जा पहुंचता है। यहां का अब तक का सबसे कम तापमान शून्य से 68 डिग्री (सेल्सियस) नीचे तक रिकॉर्ड किया गया है। गर्मियों में भी ठंड बनी रहती है। तटीय इलाकों में भी हल्की सी गर्मी बनी रहती है। ऐसा समुद्री हलचल के कारण होता है।

कई तरह के पदार्थ भी इस क्षेत्र में मिलते हैं। तेल, गैस, खनिज यहां मिलते हैं। कई किस्म की जैव विविधता यहां प्राकृतिक तौर पर संरक्षित है। हालांकि इनसान के यहां आ पहुंचने से कुछ समस्याएं उठी हैं। यह क्षेत्र इधर बीच पर्यटन व्यवसाय की भी निगाह में आया है। दुनिया के जल स्त्रोत का 1/5 प्रतिशत यहां है। इंटरनेशनल आर्कटिक साइंस कमेटी ने गत दस वर्षो में आर्कटिक क्षेत्र के बारे में कई नई जानकारियां जुटाई हैं। इस कमेटी में दुनिया भर के वैज्ञानिक और आर्कटिक विशेषज्ञ हैं।

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