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ब्रेल लिपि

ब्रेल सिस्टम एक तरह की लिपि है, जिसको दुनिया भर में नेत्रहीनों को पढ़ने और लिखने में छूकर व्यवहार में लाया जाता है। इस अनोखी कला को 1821 में खोजा गया था। यह अलग-अलग अक्षरों, संख्याओं और विराम चिन्हों को दर्शाते हैं। फ्रांसिसी लेखक ब्रेले को यह आइडिया नेपोलियन के उस कोड से आया, जिसमें लड़ाई के दौरान रात को अंधेरे में सैनिक बिना कुछ बोले अपनी बात एक दूसरे तक पहुंचा देते थे। यह नाइट राइटिंग के नाम से जाना जाता था। महत्वपूर्ण बात है कि फ्रांस के रहने वाले ब्रेल खुद एक नेत्रहीन थे।

बनावट : इसमें प्रत्येक आयताकार सेल में 6 डॉट्स होते हैं, जो थोड़े-थोड़े उभरे होते हैं। यह दो पंक्तियों में बनी होती हैं। इस आकार में अलग-अलग 64 अक्षरों को बनाया जा सकता है। सेल की बांई पंक्ति में उपर से नीचे 1,2,3 बने होते हैं। इसी तरह दांईं ओर 4,5,6 बनी होती हैं। एक डॉट की औसतन ऊंचाई 0.02 इंच होती है।

पढ़ने की तकनीक : ब्रेल स्क्रिप्ट को पढ़ने के लिए अंधे बच्चाों में इतना ज्ञान होना जरूर होता है कि वो अपनी उंगली को विभिन्न दिशाओं में सेल पर घुमा सकें। हालांकि दुनिया भर में इसको पढ़ने का कोई स्टैंडर्ड तरीका इजाद नहीं हैं। ब्रेल स्क्रिप्ट को स्लेट पर भी प्रयोग में लाया जा सकता है। इसके अलावा इसे ब्रेल टाइपराइटर पर भी प्रस्तुत किया जा सकता है। अब ब्रेल स्क्रिप्ट को 8 डॉट्स के सेल में विकसित कर दिया गया है, ताकि अंधे लोगों को अधिक से अधिक शब्दों को पढ़ने की सुविधा उपलब्ध हो सके।

इस आठ डॉट्स वाले ब्रेल स्क्रिप्ट सेल में अब 64 की बजाय 256 अक्षर, संख्या और विराम चिह्नें के पढ़ सकने की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि ब्रेल स्क्रिप्ट नेत्रहीनों के पढ़ने और लिख सकने के उपाय का पहला अध्याय नहीं रहा है। इससे पहले भी 17 वीं शताब्दी में इटली के जेसूट फ्रांसिस्को लाना ने नेत्रहीनों के लिखने-पढ़ने को लेकर काफी कोशिशें की थीं।  

(पाठकों की मांग पर)

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