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डीटीएच

डायरेक्ट टू होम या डीटीएच का अर्थ ऐसा टीवी प्रसारण से है जो सीधे सैटेलाइट से हमारे घर तक किया जाता है। इस प्रसारण में व्यक्ति को अपने घर में डिश लगानी पड़ती है। इस प्रसारण में केबल टीवी ऑपरेटर की भूमिका खत्म हो जाती है और ब्रॉडकास्टर सीधे उपभोगताओं को सेवा प्रदान करता है। डीटीएच नेटवर्क ब्रॉडकास्टिंग सेंटर, सैटेलाइट, एनकोडर, मल्टीपिल्क्सर, मॉडय़ूलेटर और उपभोगताओं से मिलकर बनता है।

एक डीटीएच सर्विस प्रोवाइडर को सैटेलाइट से केयू बैंड ट्रांसपोंडर को लीज या किराए पर लेना होता है। इसके बाउ एनकोडर ऑडियो, वीडियो व डाटा को सिगनल को डिजिटल फॉरमेट में तब्दील करता है। मल्टीपिल्कसर इन सिग्नलों को मिक्स करता है। इसके बाद उपभोगता के घर पर लगे सैट टॉप बॉक्स या डिश एंटीना डी कोड कर कार्यक्रमों को टीवी पर प्रसारित करते हैं।

डीटीएच को डायरेक्ट ब्रॉडकास्ट सैटेलाइट (डीबीएस) भी बुलाते हैं। डीबीएस को आमतौर पर मिनी डिश सिस्टम भी कहा जाता है। डीबीएस में 4 बैंड के ऊपरी हिस्से व बैंड के कुछ हिस्सों को उपयोग में लिया जाता है। संशोधित डीबीएस को सी बैंड सैटेलाइट से भी संचालित किया जा सकता है। अधिकांश डीबीएस डीवीबी-एस मानकों को अपने प्रसारण के लिए उपयोग में लाते हैं। इन मानको को पे-टीवी सर्विसेज के तहत रखा गया है। 

1962 में पहला सैटेलाइट टेलिविजन सिग्नल यूरोप से टेलिस्टार सैटेलाइट से उत्तरी अमेरिका में प्रसारित किया गया था। विश्व का पहला व्यवसायिक कम्यूनिकेशन सैटेलाइट इंटेलसैट-16 अप्रैल 1965 में लांच किया गया था। डीटीएच के विकास में इन तीन कदमों का खासा योगदान रहा है। पहले डीटीएच टीवी प्रसारण को इकरान नाम दिया गया था। यह 1976 में तत्कालीन सोवियत रूस में प्रसारित हुआ था। भारत में 1996 में डीटीएच सेवाओं को लागू करने का प्रस्ताव आया था, लेकिन 2000 में जाकर इसके प्रसारण को हरी झंडी मिली।

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