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एटीएम

आटोमेटिड टैलर मशीन यानी एटीएम को आटोमेटिक बैंकिंग मशीन, कैश पाइंट, होल इन द वॉल, बैंनकोमैट जैसे नामों से यूरोप, अमेरिका व रूस आदि में पुकारा जाता है। यह मशीन एक ऐसा टेलिकम्यूनिकेटिड व कंप्यूटराइस्ड उपकरण है जो ग्राहकों को वित्तीय हस्तांतरण से जुड़ी सेवाएं मुहैया कराता है। इस हस्तांतरण प्रक्रिया में ग्राहक को  कैशियर, क्लर्क या बैंक टैलर की मदद की आवश्यकता नहीं होती है। रिटेल बैंकिंग के सेक्टर में एटीएम बनाने का विचार समांनातर तौर जापान, स्वीडन, अमेरिका और इंग्लैंड में पनपा और विकसित हुआ। हालांकि आज तक इस बात पर एक मत नहीं बन पाया है कि सबसे पहले इसका इस्तेमाल कहां शुरू हुआ।

मौटे मौर लंदन और न्यूयॉर्क में सबसे पहले इससे इस्तेमाल में लाए जाने के विवरण दिए जाते हैं। साठ के दशक में इसे बैंकोग्राफ के नाम से जाना जाता था। कुछ दावों के अनुसार सबसे पहले प्रायोगिक तौर पर 1961 में सिटी बैंक ऑफ न्यूयॉर्क ने न्यूयॉर्क में ग्राहकों की सेवा में प्रस्तुत किया। हालांकि ग्राहकों द्वारा अस्वीकृत कर दिए जाने के कारण छह माह के बाद इससे हटा लिया गया था। इसके बाद टोक्यो, जापान में 1966 में इसके उपयोग का विवरण मिलता है।

हालांकि आधुनिक एटीएम की सबसे पहली पीढ़ी का प्रयोग 27 जून , 1967 में लंदन के बर्केले बैंक ने किया था। उस वक्त तक गिने-चुने ग्राहकों को इसकी सेवा का लाभ मिल पाया था। उस समय आज के एटीएम कार्ड के बजाए क्रेडिट कार्ड के जरिए इसकी सेवाओं का उपयोग किया जाता था। इसके पहले ग्राहक बने थे कॉमेडी एक्टर रेग वरने। इंग्लैंड ने प्रयोग में लाई गई मशीन के आविष्कार का श्रेय जॉन शेपर्ड को जाता है। हालांकि इसके
विकास में इंजीनियर डे ला रूई का भी अहम योगदान है। आज एटीएम इंटरबैंक नेटवर्क से जुडी होती हैं। यह नेटवर्क पीयूएलएसइ, पीएलयूएस आदि नामों से जाने जाते हैं।

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