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रिक्टर स्केल

हैती में हाल में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.8 मापी गई थी। भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए रिक्टर पैमाना ही काम में आता है। लेकिन यह रिक्टर पैमाना है क्या? सन् 1935 में कैलिफॉर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चाल्र्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से इस पैमाने को खोजा था।
इस स्केल का प्रारंभ में उपयोग वुड-एंडरसन टोरसन सेसिमोमीटर पर दर्ज किए गए आंकड़ों को चेक करने के लिहाज से किया गया था। शुरू में इसको इकाई के निकटतम समूह के आंकड़े के तौर पर दर्ज किया जाता था। बाद में दशमलव पद्धति को अपना लिया गया। चाल्र्स की इच्छा थी कि इस पैमाने को छोटे भूकंपों व बड़े भूकंपों के बीच में मौजूदा लोकल मैगनीटय़ूड स्केल से अलग कर समझने की।

चार्ल्स ने इस स्केल को विकसित करने की प्रेरणा मुख्यत: खगोलशास्त्र में इस्तेमाल किए जाने वाले उस मैगनीटय़ूड स्केल से पाई जिसके तहत तारों और अन्य खगोलीय पिंडो की ब्राइटनेस को मापा जाता है। रिक्टर स्केल की किसी भी प्रकार की अधिकतम या न्यूनतम सीमा तय नहीं की गई है। आधुनिक सीस्मोग्राफस आज नकारात्मक इकाइयों में भूकंपों को मापने लगे हैं।

पुराने मापक तंत्र भूकंपों को एक रेखीय तरंगों के आधार पर मापते थे। इससे बड़े भूकंपों के मापन में कई प्रकार की त्रुटियां आ जाती थी। इन कमियों को दूर करने के लिए चाल्र्स ने सरफेस व बॉडी वेब्स को मापन का आधार बनाया। रिक्टर स्केल के अलावा मरकैली स्केल  पर भी भूकंप को मापा जाता है। इसमें भूकंप को उसकी तीव्रता के बजाए उसकी ताकत के आधार पर मापते हैं। पर इसको रिक्टर के मुकाबले कम वैज्ञानिक माना जाता है।

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