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हॉकी

यह हमेशा से ही विवाद का विषय रहा है कि हॉकी का जन्म कहां हुआ। कुछ लोग मानते हैं कि ईसा से दो हजार वर्ष पूर्व हॉकी का खेल फारस में खेला जाता था। यह खेल आधुनिक हॉकी से मिलता-जुलता नहीं था। कुछ समय बाद यह खेल कुछ परिवर्तित होकर यूनान में आया जहां यह इतना प्रचलित हुआ कि यह यूनान की ओलंपिक प्रतियोगिता में खेला जाने लगा। धीरे-धीरे रोम में भी इस खेल के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा और रोम भी यूनान के ओलंपिक में इसे खेलने लगा।

हॉकी का खेल एशिया में भारत में सबसे पहले खेला गया। पहले दो एशियाई खेलों में भारत को खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन तीसरे एशियाई खेल में भारत को पहली बार खेलने का मौका मिला। भारत ने इसे अपना राष्ट्रीय खेल भी घोषित किया है।

पहली बार ओलंपिक में हॉकी 29 अक्तूबर, 1908 में लंदन में खेली गई। इसमें छह टीमें थीं। 1924 में ओलपिंक में अंतर्राष्ट्रीय कारणों से यह खेल शामिल नहीं हो सका। ओलंपिक से हॉकी के बाहर हो जाने के बाद जनवरी, 1924 में इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन की स्थापना हुई। हॉकी में भारत का प्रदर्शन खासा बेहतर रहा है। भारत ने हॉकी में अब तक ओलंपिक में आठ स्वर्ण, एक और दो कांस्य पदक जीते हैं।

इसके बाद भारत के हिस्से में अगला स्वर्ण पदक 1964 और अंतिम स्वर्ण पदक 1980 में मिला। 1928 में एम्सटर्डम में हुए ओलंपिक में भारत ने नीदरलैंड को 3-0 से हराकर पहला स्वर्ण पदक जीता था। तो 1936 के मुकाबले में जर्मनी को 8-1 से मात देकर विश्व में अपनी खेल क्षमता का लोहा मनवा दिया था। 1936 के मुकाबलों में भारतीय टीम का नेतृत्व हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद ने किया।

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