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सोलर पावर

प्रधानमंत्री ने हाल में सिलिकॉन वैली की तर्ज पर भारत में सोलर वैली बनाने की इच्छा जताई है। सौर ऊर्जा सूर्य से प्राप्त कर ऊष्मा या बिजली में तब्दील की जाती है। घरों, कारों और वायुयानों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होता है। ऊर्जा का यह रूप साफ और प्रदूषण रहित होता है। सूर्य से ऊर्जा प्राप्त कर उसे इस्तेमाल करने के लिए सोलर पैनलों की जरूरत होती है।

सोलर पैनलों में सोलर सेल होते हैं जो सूर्य की ऊर्जा को इस्तेमाल लायक बनाते हैं। यह कई तरह के होते हैं। उदाहरण के लिए पानी गर्म करने वाले सोलर पैनल बिजली पहुंचाने वाले सोलर पैनलों से फर्क होते हैं। इसे दो तरीकों से इस्तेमाल हेतु बदला जाता है। इनमें से पहली है सोलर थर्मल विधि। इससे सूर्य की ऊर्जा से हवा या तरल को गर्म किया जाता है। इस विधि का इस्तेमाल घरेलू कार्यो में किया जाता है। दूसरा तरीका प्रकाशविद्युत विधि का है। प्रकाशविद्युत विधि में सौर ऊर्जा को बिजली में बदलने के लिए फोटोवोल्टेक सेलों का इस्तेमाल होता है। फोटोवोल्टेक सेल का रखरखाव सस्ता होता है।

कुछ वर्ष पूर्व तक सौर ऊर्जा का इस्तेमाल पुराने ढंग से बनी इमारतों में किया जाता रहा है। इधर कुछ विकसित देशों में जीवाश्म ईंधन की कमी के कारण सौर ऊर्जा की तरफ विशेषज्ञों का ध्यान गया है। अनेक उद्योगों में सौर ऊर्जा को अपनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कई दूरदराज के क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल जारी है जहां अन्य ऊर्जा स्त्रोतों की पहुंच कम है।

हालांकि, व्यापक पैमाने पर बिजली निर्माण के लिए पैनलों पर भारी निवेश करना पड़ता है। दूसरा, दुनिया में अनेक स्थानों पर सूर्य की रोशनी कम आती है, इसलिए वहां सोलर पैनल कारगर नहीं हैं। तीसरा, सोलर पैनल बरसात के मौसम में ज्यादा बिजली नहीं बना पाते। फिर भी विशेषज्ञों का मत है कि भविष्य में सौर ऊर्जा का अधिकाधिक इस्तेमाल होगा।

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