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यूरोपियन एमिशन स्टेंडर्ड

सरकार ने इधर एक घोषणा में कहा था कि वह वाहन संबंधित नए नियामक शीघ्र लागू करेगी। नई दिल्ली में चली ऑटो एक्सपो में भी एक से बढ़कर एक नई कारों के मॉडल लोगों ने देखे। इस दिशा में यह जानना जरूरी है कि नए नियामक कैसे हो सकते हैं। यूरोपियन एमिशन स्टेंडर्ड ऐसे ही प्रदूषण संबंधी नियामक हैं जो यूरोप में सभी वाहनों पर लागू किए जाते हैं।

यूरोपियन एमिशन स्टेंडर्डस सभी यूरोपियन देशों में एक समान लागू हैं। मौजूदा समय में नाइट्रोजन ऑक्साइड, समूचे हाइड्रोकार्बन, गैर-मीथेन हाइड्रोकार्बन, कार्बन मोनोऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर संबंधी उत्सर्जन पर कारों, ट्रेनों, ट्रैक्टरों, लॉरियों और इनसे संबंधित मशीनरी पर यह कड़े नियामक लागू हैं। इनके विपरीत, समुद्री जहाजों और हवाई जहाजों को इन नियामकों से दूर रखा गया है। चूंकि हरेक वाहन पर नियामक उसके आकार के अनुसार ही तय किए जाते हैं। मानकों पर खरे न उतरने वाले वाहनों की बिक्री पर सख्ती से रोक है।

नए वाहन वाले मॉडलों को सख्ती से मौजूदा नियामकों पर खरा उतरना पड़ता है। लेकिन पुराने इंजन वाले और पिछले उत्सर्जन संबंधी नियामकों पर उतारे गए वाहनों में मामूली से फेरबदल के बाद उनकी बिक्री पर छूट है। यूरोपीय संघ में कुल कार्बन उत्सर्जन का 20 प्रतिशत सड़क यातायात से निकलता है। क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत उद्योग जगत के सभी हलकों से 8 प्रतिशत उत्सर्जन की कमी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन हालिया वर्षो में यातायात से उत्सर्जन की मात्र में काफी तेज वृद्धि हुई है। मौजूदा समय में यूरोपीय संघ से पूरी दुनिया में यातायात संबंधी कार्बन उत्सर्जन 3.5 प्रतिशत निकलता है। यूरोपियन एमिशन स्टेंडर्ड का यूरो-ककक एक जनवरी, 2006 को लागू किया गया था।

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  • Web Title:यूरोपियन एमिशन स्टेंडर्ड