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फोर स्ट्रोक इंजन

आपने अकसर गाड़ी खरीदते वक्त या विज्ञापनों में फोर स्ट्रोक इंजन शब्द के बारे में सुना होगा। फोर स्ट्रोक इंजन की क्षमता को बताता है। इससे आपको गाड़ी की दहन, कंप्रेशन और एग्जास्ट के बारे में जानकारी मिलती है। इंजन की क्षमता से ये आकलन भी हो जाता है कि गाड़ी कितना भार सहन करने में सक्षम है। वर्तमान में गाड़ियों में सामान्यत: फोर स्ट्रोक इंजन का प्रयोग ज्यादा होता है। इससे पहले गाड़ियों में टू स्ट्रोक इंजन का इस्तेमाल हुआ करता था, लेकिन माइलेज खराब होने और लाइफ कम होने के कारण इसका स्थान फोर स्ट्रोक इंजन ने ले लिया। इस इंजन की खोज जर्मन इंजीनियर निकोलस आटो ने 1876 में की थी।

कैसे करता हैं काम : फोर स्ट्रोक इंजन एक पूरी साइकिल यानी एक बार में चार चार प्रक्रियाओं से गुजरता है। जिन्हें स्टोक कहा जाता है। पहला इनटेक वाल्व, जब यह खुलता है, तो यह काबरेरेटर से हवा और ईंधन को खींचता है। दूसरा कंप्रेस साइकिल में ईंधन और हवा के मिश्रण को कंप्रेस करने का काम करता है। उस दौरान इनटेक और एग्जास्ट वाल्व बंद रहता है। तीसरा पावर स्ट्रोक, इस प्रक्रिया में ही पावर उत्पन्न होती है। इसमें स्पार्क प्लग के माध्यम से ईंधन और हवा का दहन होता है। अंतिम चरण एग्जास्ट साइकिल का होता है, इनकेट की प्रक्रिया के दौरान यह वाल्व खुलता है और ईंधन दहन केदौरान धक्का मिलने पर यह वाल्व काम करने लगता है और प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

फायदे
- यह इंजन की पावर को बढ़ाता है। 
- गाड़ी की माइलेज को बेहतर करता है। 
- ऊर्जा का पूरा उपयोग होने से इंजन की आयु बढ़ती है और वह धुंआ कम फेंकता है।

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  • Web Title:फोर स्ट्रोक इंजन