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ओपन सोर्स

पिछले कुछ दिनों से सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में ओपेन सोर्स काफी चर्चा में है। कंप्यूटर क्षेत्र की बड़ी कंपनियां अकसर अपने ओपेन सोर्स सिस्टम जारी करती हैं। ओपेन सोर्स के माध्यम से किसी व्यक्ति को सॉफ्टवेयर का सोर्स कोर्ड मुहैया होगा।

सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में ओपेन सोर्स का जिक्र पहली बार 1990 के दौरान आया जब कई कंपनियों ने अपने सॉफ्टवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम ओपेन सोर्स जारी किए थे। ओपेन सोर्स पहली बार बड़े स्तर पर 1998 में देखने में आया जब नेविगेटर (मोजिला) का सोर्स कोड जारी किया। ओपेन सोर्स के कई स्तर हैं। कई कंपनियां ओपेन सोर्स को जारी करते वक्त उस पर कुछ प्रतिबंध लगा देती हैं ताकि उसका दुरुपयोग न हो सके।

फायदा
ओपेन सोर्स का सबसे बड़ा फायदा ये है कि उपभोक्ता के पास इसका सोर्स कोर्ड मौजूद होने की वजह से वह इसका इस्तेमाल अपनी इच्छा के मुताबिक कर सकता है। एपल सरीखी कंपनियां अपनी तकनीकों को ओपेन सोर्स लाइसेंस के द्वारा जारी करती हैं जिसके ऐवज में उपभोक्ताओं से वो पैसे लेती हैं।

तकरीबन एक वर्ष पहले बाजार में गूगल फोन के ओपेन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम की काफी चर्चा थी। उस फोन में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग किया गया था। एंड्रॉयड एक ओपेन सोर्स ओपरेटिंग सिस्टम है यानी इसका कोड भी उपलब्ध होगा, जिसमें डेवलपर परिवर्तन करके इसके फंक्शन को बढ़ा और कम कर सकता है। उदाहरण के तौर पर आप अपने फोन के मीडिया प्लेयर में अपने मनमुताबिक परिवर्तन करना चाहते हैं, तो आप इसके कोड की प्रोग्रामिंग बदल सकते हैं।

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