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वेब ब्राउजर

प्रत्येक कंप्यूटर एक ऑपरेटिंग सिस्टम को सपोर्ट करता है, किसी के सिस्टम में विंडोज, तो किसी में लाइनक्स या यूनिक्स होता है। प्रत्येक व्यक्ति और कंपनी अपनी जरूरतों के अनुसार ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टाल कराते हैं। प्रत्येक ऑपरेटिंग सिस्टम की प्रोग्रामिंग अलग होती है और फंक्शन भी।

इंटरनेट के शुरुआती दौर में ऑपरेटिंग सिस्टम का अलग-अलग होना एक बड़ी समस्या थी। अलग ऑपरेटिंग सिस्टम होने के कारण एक ऑपरेटिंग सिस्टम को दूसरे से कम्युनिकेशन के लिए दिक्कत आने लगीं। इस दौर में ऐसी लैंग्वेज की शिद्दत से जरूरत महसूस की जाने लगी, जो सभी ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए समान हो।

ऐसे में इनफॉरमेशन के आदान-प्रदान के लिए सर्वमान्य लैंग्वेज एचटीएमएल(हाइपर टेक्सट मार्क अप लैंग्वेज) आई। इसकी प्रोग्रामिंग और फंक्शन ऐसा बनाया गया, जो वेब ब्राउजर को समझ में आए। प्रत्येक वेबब्राउजर एचटीएमएल लैंग्वेज को समझता है। शुरुआत के दिनों के कई ब्राउजर सिर्फ एचटीएमल को सपोर्ट करते थे, लेकिन वर्तमान में ब्राउजर एचटीएमएल सरीखी दूसरी लैंग्वेज जैसे कि एक्सएचटीएमएल को सपोर्ट करने लगे।

इतिहास : 1991 में टिम बर्नर ली ने कई तकनीके मिलाकर वेब ब्राउजर की नींव रखी। इस वेब ब्राउजर का नाम वर्ल्ड वाइड वेब था।

ब्राउजर तकनीक : पेज को यूआरएल (यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर) के रूप में लोकेट किया जाता है, जिसको एड्रेस के तौर पर जाना जाता है। इसकी शुरुआत एचटीटीची से होती है। कई ब्राउजर एचटीटीपी के अलावा दूसरे यूआरएल टाइप और उनके प्रोटोकॉल जैसे गोफर, एफटीपी आदि को सपोर्ट करते हैं।
(पाठकों की मांग पर)

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