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बिग बैंग

हमारी सारी भौतिक मान्यताएं बस एक घटना से परिभाषित होती  हैं बिग बैंग। बिग बैंग एक जोरदार धमाका है, जिससे ब्रह्मांड का जन्म हुआ था। बिग बैंग थ्योरी के अनुसार लगभग 12 से 14 अरब वर्ष पहले संपूर्ण ब्रह्मांड एक परमाण्विक इकाई के रूप में था। यह वह समय था जब मानवीय समय और स्थान जैसी कोई चीज अस्तित्व में नहीं थी। बिग बैंग मॉडल के अनुसार इस धमाके में इतनी अधिक ऊर्जा का उत्सजर्न हुआ जिसके प्रभाव से आज तक हमारा ब्रह्मांड फैल रहा है।

क्या है मान्यता
बिग बैंग या महाविस्फोट के इस धमाके के मात्र 1-43 सेकेंड समय के बाद समय, अंतरिक्ष की मान्यताएं अस्तित्व में आ चुकी थीं। भौतिकी के नियम लागू होने लगे थे। 1-34 वें सेकेंड में ब्रह्मांड 1+30 गुणा फैल चुका था और अब क्वार्क, लैप्टान और फोटोन का गर्म द्रव्य बन चुका था। 1-4 सेकेंड क्वार्क मिलकर मिलकर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बनाने लगे, ब्रह्मांड अब कुछ ठंडा हो चुका था। हाइड्रोजन, हीलियम आदि की शुरुआत होने लगी और तत्व बनने लगे थे। 

इतिहास : बिग बैंग थ्योरी की शुरुआत आधुनिक भौतिकी में जॉर्ज लिमेत्री के नाम दर्ज है। लिमेत्री रोमन कैथोलिक पादरी थे और साथ ही वैज्ञानिक भी। उनकी यह थ्योरी अल्बर्ट आइंसटीन के मशहूर ‘सामान्य सापेक्षवाद’ के सिद्धांत पर आधारित थी। बिंग बैंग थ्योरी दो मुख्य धारणाओं पर आधारित होती है। पहला फिजिकल नियम और दूसरा कॉस्मोलाजिकल सिद्धांत। कॉस्मोलॉजिकल सिद्वांत के मुताबिक ब्रह्मांड होमोजीनस और आइसोट्रॉपिक होता है।

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