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ऑपरेटिंग सिस्टम

ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर कंपोनेंट होता है। इसी की सहायता से कंप्यूटर में मौजूद प्रोगाम चलते हैं। बाजार में कई तरह के सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं, इनमें विंडोज, यूनिक्स और लाइनक्स प्रमुख हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर की बैकबोन है, जो इसके सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर को काबू में रखती है।

क्या काम करता है : ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर से जुड़े कई बेसिक कामों मसलन की-बोर्ड से  इनपुट लेना, डिस्प्ले स्क्रीन को आउटपुट भेजना, डाइरेक्टरी और फाइल को डिस्क में ट्रेक करने जैसे कार्य करता है। बड़े सिस्टमों में इसका काम और बढ़ जाता है। वह इनमें लगातार यह चेक करता है कि एक ही समय पर कंप्यूटर में चलने वाले प्रोगामों, फाइलों और एक ही समय पर खुलने वाली साइटों में ओवरलेपिंग न हो।

इतिहास : शुरु में ऑपरेटिंग सिस्टम मेनफ्रेम कंप्यूटरों पर बड़े कामों के लिए ही हुआ करता था। यह धीरे-धीरे माइक्रोऑपरेटिंग सिस्टम में भी मिलने लगा, लेकिन उस दौरान इसमें एक समय पर केवल एक ही प्रोगाम रन करा सकते थे। मेन फ्रेम कंप्यूटर  में 1960 में पहली बार मल्टीटास्किंग सिस्टम आया। इससे एक समय में एक से ज्यादा यूजर काम करने लगे। 1970 में लाइनक्स पहली बार पीडीपी-7 में ऑपरेटिंग सिस्टम लाया, जिसमें मल्टीटास्किंग, मेमोरी मैनेजमेंट, मेमोरी प्रोटेक्शन जैसे खास फीचर थे।

फायदे : ऑपरेटिंग सिस्टम काफी उपयोगी है। यह अनाधिकृत व्यक्ति को कंप्यूटर के गलत इस्तेमाल से रोकता है। वह इसमें भी विभेद कर सकता हैं कि कौन सी रिक्वेसट पूरी करनी है और कौन सी नहीं। इसकी मदद से आप एक से ज्यादा सीपीयू में प्रोगाम रन करा सकते हैं।

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