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आरएनए

ज्यादातर लोग डीएनए के बारे में जानते हैं, लेकिन किसी भी जीवित प्राणी के शरीर में आरएनए यानी राइबोन्यूलिक एसिड भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आरएनए शरीर में डीएनए को जीन्स को कॉपी कर के व्यापक तौर पर प्रवाहित करने में बड़ी भूमिका निभाता है। साथ ही यह कोशिकाओं में अन्य जेनेटिक सामग्री पहुंचाने में भी मदद करता है।

आरएनए की खोज सेवेरो ओकोआ, रॉबर्ट हॉली और कार्ल वोसे ने की थी। आरएनए के जरूरी कार्यो में जीन को सुचारू बनाना और उनकी प्रतियां तैयार करना होता है। यह विभिन्न प्रकार के प्रोटीन्स को जोड़ने का भी कार्य करता है। इसकी कई किस्में होती हैं जिनमें रिबोसोमल आरएनए, ट्रांसफर आरएनए और मैसेंजर आरएनए प्रमुख हैं।

आरएनए की श्रृंखला फॉस्फेट्स और रिबोस के समूहों से मिलकर बनती है, जिससे इसके चार बुनियादी तत्व, एडिनाइन, सिटोसाइन, गुआनाइन और यूरेसिल जुड़े होते हैं। डीएनए से विपरीत, आरएनए अकेली श्रृंखला होती है जिसकी मदद से यह खुद को कोशिका के संकरे आकार में समाहित कर लेता है। 

विभिन्न शोधों से आरएनए के बारे में कई रोचक तथ्य सामने आए हैं। आरएनए का स्वरूप एक सहस्नब्दी यानी एक हजार वर्षो में बहुत कम बदलता है।लिहाजा इसका इस्तेमाल विभिन्न प्राणियों के संयुक्त पूर्वज की खोज में किया जाता है। डीएनए ही आरएनए के संधिपात्र की भूमिका अदा करता है। मूलत: डीएनए में ही आरएनए का डिजाइन निहित होता है। इसलिए जब जरूरत होती है तब डीएनए, जिसके पास आरएनए बनाने का अधिकार होता है, आवश्यक सूचना लेकर काम में लग जाता है।

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  • Web Title:आरएनए