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मॉर्फिग

मॉर्फिग चित्रों को एडिट करने की तकनीक है। उसमें एक ही फोटो को कई तरीके से या दो और दो से ज्यादा फोटो को एक साथ मिलाकर उसे बेहतर या अलग रूप दिया जाता है। यह काम इतनी बारीकी से किया जाता है कि देखने वाले को ये एहसास तक नहीं होता कि दो फोटो या चित्रों को मिलाकर बनाया गया है।

वैसे तो मॉर्फिग का इस्तेमाल फिल्मों में पहले से होता चला आ रहा था, लेकिन नब्बे के दशक में कम्प्यूटर आने के बाद इसका ज्यादा प्रयोग दिखने लगा। आज तो यह तकनीक, फिल्मों, विज्ञापन और मीडिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

शुरू में मॉर्फिग दो चित्रों को कॉस फेड के रूप में होती थी, जिसमें कैमरा एक चेहरे या वस्तु पर पड़ने के बाद धीरे धीरे उसे धुंधला करता जाता था और बाद में किसी दूसरी वस्तु या चेहरे पर आकर टिक जाता था। बाद में चेहरे या ऑब्जेक्ट को पूरी तरह फेड किया जाने लगा। जैसे जैसे फिल्म एडिटिंग डिजिटल होती गई, मॉर्फिग पहले से कहीं बेहतर होने लगी।

आम लोग भी कम्प्यूटर पर इस तकनीक का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे किसी गुमशुदा व्यक्ति के पुराने फोटो के आधार पर मॉर्फिग के जरिए उसकी आज की तस्वीर बनाई जा सकती है। मॉर्फिग से हम यह भी देख सकते हैं कि कोई व्यक्ति बालों का विग, चश्मा या कोई दूसरी चीज का इस्तेमाल करने पर कैसा दिखेगा।

यह फिल्मों के साथ ही कमर्शियल विज्ञापनों में भी काम में लाई जाती है। मनुष्य के शरीर का विकास और अंगों की उत्पत्ति व उनके विकास आदि का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिकों को भी इसकी जरूरत पड़ती है। कम्प्यूटर पर ज्यादा आधुनिक मॉर्फिग के प्रोग्राम अधिक मेमोरी का इस्तेमाल कर सकते हैं और यह केवल हाई मेमोरी वाले कम्प्यूटर में ही डाउनलोड किए जा सकते हैं।

घरों में इस्तेमाल करने वालों के लिए कई छोटे और मुफ्त प्रोग्राम होते हैं। बेसिक प्रोग्राम से लेकर कॉम्पलेक्स प्रोग्राम तक मॉर्फिग की क्वालिटी बढ़ती जाती है। व्यंग्यकारों और अंतरिक्ष विज्ञानियों के लिए भी यह तकनीक महत्वपूर्ण है और वे अपने काम में इसका प्रयोग करते हैं।

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