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यूजनेट

यूजनेट को यूजर्स नेटवर्क भी कहते हैं। यह इंटरनेट की सबसे पुरानी सेवा है। इसे 1979 में डय़ूक यूनिवर्सिटी में डिजाइन किया गया था। इसके एक साल बाद इसे नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी में विकसित किया गया। इसके जरिए हम एक नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटर्स में लिखित संदेश का ट्रांसफर कर सकते हैं।

यूजनेट कई हजार फोरम और न्यूजग्रुप को एक दूसरे से जोड़ता है। न्यूजग्रुप वास्तव में बुलेटिन बोर्ड सिस्टम्स (बीबीएस) की तरह होते हैं। इस पर भेजे जाने वाले पोस्ट या संदेश एक बढ़ते क्रम में दिखाई देते हैं। जब किसी संदेश पर नई बहस शुरू की जाती है तो उसमें नया टॉपिक जुड़ जाता है। न्यूजग्रुप पर सभी सदस्य संदेश पढ़ कर उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। वे चाहें तो अपनी पहचान छुपा कर भी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

यूजनेट एक तरीके से वेबसाइट्स पर रजिस्टर्ड सदस्यों के उस फोरम की अगली कड़ी है, जहां नेट पर बहस की जा सकती है। इसकी खासियत यह है कि न्यूजग्रुप की तुलना में यहां किसी टॉपिक पर गहराई से बहस करने के लिए ज्यादा लोग और ज्यादा अवसर होते हैं। इसकी मदद से आप तेजी से लोगों से जुड़ सकते हैं या फिर उन्हें रिस्पांस दे सकते हैं। यूजनेट का हिस्सा बनने के लिए न्यूज सर्वर की सहायता लेनी पड़ती है। उसे गूगल से भी एक्सेस किया जा सकता है।

बीबीएस और यूजनेट में अंतर यह है कि बीबीएस में केवल एक नेटवर्क होता है और यह केवल एक सीमित क्षेत्र में काम करता है। बीबीएस में एक संगठित क्रम होता है और उसके हर सदस्य के लिए एक टॉपिक तय होता है।

हर न्यूजग्रुप की पहचान इसके टॉपिक से ही होती है। इसी से इसका एक चार्ट बनता है, नए लोग चार्ट से टॉपिक के अनुसार संदेश पढ़ सकते हैं। दूसरी ओर यूजनेट का नेटवर्क ग्लोबल होता है और इसमें दुनिया भर के लोग अपने पोस्ट लिखकर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। एक यूजनेट रीडर के लिए अपनी पसंद का न्यूजग्रुप चुनना और उसके टॉपिक पर लिखना या बहस में शामिल होना आसान होता है।

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