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विटामिन-एफ

हम पहले भी विटामिन की जीवन में भूमिका को आपके सामने लाए हैं। अपने आहार में विटामिन की ज्यादा से ज्यादा मात्र, इनसान को स्वस्थ रखती है। दरअसल, विटामिन शब्द अंग्रेजी शब्द ‘वाइटल’ से आया है, जिसका अर्थ होता है - अत्यंत महत्वपूर्ण। आज हम आपको विटामिन-एफ के बारे में बता रहे हैं।

विटामिन-एफ फैटी एसिड से बना होता है। इसीलिए इसका नाम ‘विटामिन-एफ’ पड़ा है। यह दो प्रकार के होते हैं - ओमेगा-3 तथा ओमेगा-6। इस विटामिन का मुख्य कार्य शरीर के ऊतकों का निर्माण और उनकी मरम्मत करना होता है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ.डी.ए.) विटामिन-एफ को अपने दिन के पूरे कैलोरी इनटेक में से एक से दो प्रतिशत ग्रहण करने का सुझव देता है।

इसके अलावा, शरीर के मेटाबोलिज्म, बालों तथा त्वचा के लिए भी विटामिन-एफ खासे लाभदायक होते हैं। दरअसल, हमें जब भी कहीं चोट लगती है तो उससे त्वचा के ऊतकों को काफी नुकसान पहुंचता है। विटामिन-एफ इन ऊतकों की मरम्मत कर उन्हें ठीक करते हैं।

वे लोग जिन्हें जल्दी थकान हो जाती है, विटामिन-एफ की कमी के शिकार होते हैं। कमजोर बाल, रूखी त्वचा एवं सूखी आंखें, इस बात का संकेत हैं कि आपकी खुराक में इसकी कमी है। इसकी कमी से त्वचा रोग जैसे एग्जीमा का खतरा भी बढ़ जाता है। यह विटामिन हमारे पेट में बैक्टीरिया भी बनाता है, जिससे हमारी पाचन शक्ति बढ़ती है।

अगर आप अपने शरीर में विटामिन-एफ की मात्र बढ़ाना चाहते हैं तो मछली एवं मूंगफली का सेवन करें। मैकरेल, टूना मछली विटामिन-एफ के बड़े स्रोत हैं। शाकाहारी लोगों के लिए विटामिन-एफ प्राप्त करने का सबसे पहला लक्ष्य है कि वह अपने खाद्य तेल में बदलाव लाएं। सूरजमुखी, राई, अखरोट आदि के तेल में खाना पकाएं। इन तेलों के विटामिन-एफ के अलावा कई अन्य पोषक तत्व भी होते हैं।  

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