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माइक्रोस्कोपी

माइक्रोस्कोपी विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें हम उन सूक्ष्म चीजों को बड़ा कर देख सकते हैं, जिन्हें साधारण आंखों से नहीं देखा जा सकता। इसका उद्देश्य सूक्ष्मजीव संसार का अध्ययन करना है। विज्ञान की इस शाखा का जीव विज्ञान में काफी इस्तेमाल किया जाता है। दुनिया भर में बीमारियों के नियंत्रण और नई दवाओं की खोज के लिए माइक्रोस्कोपी का सहारा लिया जाता है।

माइक्रोस्कोपी का जन्म 1600 में माना जाता है। यही वह समय था, जब वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने लेंस की खोज की। लेंस के आविष्कार के बाद वस्तुओं को उनके मूल आकार से बड़ा कर देखना संभव हो गया। इससे पानी में पाए जाने वाले छोटे और अन्य अति सूक्ष्म जंतुओं की गतिविधियों को देख पाना आसान हुआ और वैज्ञानिकों को उनके बारे में नई बातें जानने को मिली। इसके बाद ही वैज्ञानिकों को यह एहसास हुआ कि प्राणी जगत के बारे में उनका ज्ञान कितना कम था।

माइक्रोस्कोपी की शाखा के रूप में ऑप्टिकल माइक्रोस्कोपी का जन्म सबसे पहले माना जाता है। इसे लाइट माइक्रोस्कोपी भी कहते हैं। जीव-जंतुओं के अंगों को देखने के लिए इसका प्रयोग होता है। ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप महंगे होते हैं, हालांकि वे बेहतर उपकरण है।

माइक्रोस्कोपी के क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी की खोज बहुत महत्वपूर्ण कहा जाता है क्योंकि इसकी खोज के बाद वस्तुओं को उनके वास्तविक आकार से कई हजार गुना बड़ा करके देखा जाने लगा।

इसकी खोज बीसवीं सदी में हुई। हालांकि इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप महंगा होता था और प्रयोगशाला में इसका प्रयोग करना छात्रों के लिए संभव नहीं होता, लेकिन इसके परिणाम काफी बेहतर होते हैं।

माइक्रोस्कोपी में एक अन्य तकनीक का प्रयोग होता है, जो इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी  से भी बेहतर मानी जाती है। इसमें हाथ और सलाई के इस्तेमाल से वस्तु का कई कोणों से परीक्षण होता है। ग्राहम स्टेन ने इसी प्रक्रिया में सबसे पहले बैक्टीरिया को देखा था।

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  • Web Title:माइक्रोस्कोपी