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डिजिटल इंक

डिजिटल इंक तकनीक का ऐसा रूप है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक तरीके से कम्प्यूटर के मॉनीटर पर हैंडराइटिंग या ड्राइंग की जा सकती है। इसे इस तरीके से समझ सकते हैं कि इसमें डिजिटल पेपर पर एक डिजिटल पेन (जिसे स्टाइलस कहते हैं) से लिखा जाता है। इस तकनीक से हम लिखाई बेहतर कर सकते हैं।

आमतौर पर डिजिटल इंक और इलेक्ट्रॉनिक इंक या ई-इंक को एक ही समझा जाता है, लेकिन वास्तव में इसमें अंतर है। ई-इंक एक विशेष तरह का इलेक्ट्रॉनिक पेपर है जिस पर डिजिटल पेन की मदद से लिखा जाता है, जबकि डिजिटल इंक ज्यादा सरल और व्यापक शब्द है। यह कम्प्यूटर के मॉनीटर पर हैंडराइटिंग, टेक्स्ट और ड्राइंग करने और उसमें तमाम प्रयोगों के लिए इस्तेमाल होता है। 

डिजिटल इंक की शुरुआत 1990 में क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने पर हस्ताक्षर से हुई। बाद में कम्प्यूटर, मोबाइल फोन और ई रीडर पर डाटा एंट्री के लिए इसका प्रयोग किया जाने लगा। समय के साथ इसका दायरा व्यापक हुआ और इसका इस्तेमाल ड्राइंग, एनीमेशन, कैमरा और वाइटबोर्ड्स पर भी होने लगा। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लेक्चर के दौरान डिजिटल इंक का प्रयोग किया जाता है। स्लाइड पर इसके इस्तेमाल से चीजों को आसानी से समझाने में मदद मिलती है।

इस तरीके से एकत्र की सूचनाओं को बाद में अन्य रूपों में बदल भी सकते हैं, जिनसे उसे दूसरे कामों में भी लाया जा सकता है। कई बिजनेस, मेडिकल और सरकारी ऑफिसों में कागज का प्रयोग कम हो गया है। ठीक ऐसे ही डिजिटल इंक और पेंटिंग ने पारंपरिक इंक और पेंटिंग की तकनीक की जगह ले ली है।

पेंटर्स अब ओरिजनल पेंटिंग्स सॉफ्टवेयर की मदद से कम्प्यूटर पर तैयार कर उसमें रंगों, आकार और अन्य बदलाव करने में सक्षम होते हैं। वे दूसरी तकनीक के जरिए पेंटिंग्स के साथ ही म्यूजिक बैकग्राउंड और स्पेशल इफेक्ट भी दे सकते हैं।

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