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क्लोरीन

क्लोरीन एक पीले और हरे रंग की प्राकृतिक गैस है। यह हवा से हल्की होती है, लेकिन निश्चित दाब और तापमान पर द्रव में बदल जाती है। यह पृथ्वी के साथ ही समुद्र में भी पाई जाती है। क्लोरीन पौधों और मनुष्यों के लिए आवश्यक है। इसका प्रयोग कागज और कपड़े बनाने में किया जाता है। इसमें यह ब्लीचिंग एजेंट (धुलाई करने वाले द्रव्य) के रूप में काम में लाई जाती है। हवा की मौजूदगी में यह पानी के साथ क्रिया कर हाइड्रोक्लोरिक एसिड का निर्माण करती है। मूलत: गैस होने के कारण यह खाद्य श्रृंखला का हिस्सा नहीं है।

यह गैस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। स्विमिंग पूल में इसका प्रयोग कीटाणुनाशक की तरह किया जाता है। घर की धुलाई में इसे इस्तेमाल करते हैं। ब्लीच और कीटाणुनाशक बनाने के कारखाने में काम करने वाले लोगों में इससे प्रभावित होने की आशंका ज्यादा रहती है। अगर कोई लंबे समय तक इसके संपर्क में रहता है तो उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसकी तेज गंध आंखों, त्वचा और श्वसन तंत्र के लिए नुकसानदेह है। इससे गले में घाव, खांसी और आंखों व त्वचा में जलन हो सकती है, इससे सांस लेने में दिक्कत होती है।

दुनिया में रोज 25 हजार लोग पानी से होने वाली बीमारियों से मर जाते हैं। इसे रोकने के लिए पानी को क्लोरीन से साफ करना बहुत जरूरी है। 1991 में पेरू की सरकार ने पानी की सप्लाई में क्लोरीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। क्लोरीन से पूरे दक्षिण अफ्रीका में कॉलरा फैल गया था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। 

क्लोरीन दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाला एक महत्वपूर्ण औषधीय घटक भी है। मलेरिया, खांसी, टाइफाइड और ल्यूकेमिया आदि के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं में क्लोरीन मिलाई जाती है। पानी के शुद्धिकरण के लिए इसका प्रयोग सबसे ज्यादा किया जाता है। कई देशों ने पानी के शुद्धिकरण के लिए इसके प्रयोग के लिए कानूनी नियम भी बना रखे हैं।

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