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एंजाइम्स

एंजाइम्स हमारे शरीर में होने वाली जैविक क्रियाओं के उत्प्रेरक हैं। ये जरूरी क्रियाओं के लिए शरीर में तमाम तरह के प्रोटीन का निर्माण करते हैं। इनकी भूमिका इतनी महत्वपूर्ण है कि ये या तो शरीर की रासायनिक क्रियाओं को शुरू करते हैं या फिर उनकी गति बढ़ाते हैं। उत्प्रेरण का इनका गुण एक चक्रीय प्रक्रिया है। वे रासायनिक तत्व, जो एंजाइम्स की क्रियाओं के फलस्वरूप तैयार होते हैं, सबस्ट्रेट और जो उनकी मौजूदगी के बिना तैयार होते हैं, रिएक्टेंट कहलाते हैं।

मनुष्य के शरीर में होने वाली ये रासायनिक क्रियाएं उसके जीवन के लिए अनिवार्य हैं। हमारा शरीर छोटी-छोटी करोड़ों कोशिकाओं से मिलकर बना है। रासायनिक क्रियाओं के फलस्वरूप इन कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है। शरीर में ये क्रियाएं निर्बाध रूप से होती रहें, इसके लिए एंजाइम्स की उपस्थिति जरूरी है।  

आमतौर पर एंजाइम्स, सबस्ट्रेट के साथ तीन तरह से क्रिया करते हैं - सबस्ट्रेट का अनुकूलन, भौतिक बल और सबस्ट्रेट से क्रिया कर। सबस्ट्रेट का अनुकूलन तब होता है, जब एंजाइम सबस्ट्रेट अणुओं के साथ क्रिया करउनके साथ रासायनिक संबंध बनाता है। इसमें एंजाइम, सबस्ट्रेट से क्रिया कर उसके अणुओं को तोड़ देता है। सबस्ट्रेट के साथ क्रिया कर एंजाइम उसमें रासायनिक परिवर्तन करता है और अणुओं के इलेक्ट्रॉन की स्थिति बदल देता है। इसके कारण ही अणु बाकी अणुओं के साथ संबंध बना पाते हैं।

एंजाइम्स जब सबस्ट्रेट के संपर्क में आते हैं तो उन पर गड्ढे बन जाते हैं। एंजाइम के संपर्क में आने पर सबस्ट्रेट इन गड्ढों के साथ क्रिया कर रासायनिक निर्माण करते हैं। इसके पूरे होने पर वह उस उत्पाद को मुक्त कर देते हैं और दूसरे सबस्ट्रेट के साथ क्रिया के लिए तैयार हो जाते हैं। इस तरह एंजाइम्स कभी नष्ट नहीं होते, बल्कि बार बार चक्रीय प्रक्रिया में शामिल होते रहते हैं। एंजाइम्स के न बनने पर फेनिलकीटोनूरिया बीमारी होती है, जिससे दिमागी विकास में रुकावट आती है।

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