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मैग्नीशियम

मैग्नीशियम एक रासायनिक तत्व है जो तमाम सभी जीव जंतुओं के साथ मनुष्य के लिए भी उपयोगी है। इसकी परमाणु संख्या 12 है और आवर्त सारणी में इसे ‘एमजी’ से इंगित किया जाता है। यह कैलिशयम और बेरियम की तरह एक क्षारीय तत्व है। यह प्रकाश का स्नोत है और जलने पर सफेद रोशनी देता है। यह आदमी के शरीर में पाए जाने वाले पांच प्रमुख तत्वों में से एक है। शरीर का आधे से ज्यादा मैग्नीशियम हमारी हड्डियों में पाया जाता है जबकि बाकी शरीर में हाने वाली जैविक कियाओं में सहयोग करता है। आमतौर पर एक स्वस्थ खुराक में इसकी पर्याप्त मात्रा होती है। इसकी अधिकता से डायरिया और कमी से न्यूरोमस्कुलर समस्या हो सकती है। यह हरी सब्जियों में पाया जाता है। सर हंफ्री डेवी ने मैग्नीशियम की खोज 1808 में की थी। माना जाता है कि डेवी ने वास्तव में धातु के एक ऑक्साइड को खोजा था, जो बाद में एक तत्व निकला। यह भी माना जाता है कि मैग्नीशियम की खोज 18वीं सदी के मध्य में हुई थी। हालांकि इसके एक रूप एप्सम सॉल्ट की खोज 17वीं सदी में हुई और वह आज भी नहाने वाले सोख्ता के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका दूसरा प्रकार मिल्क ऑफ मैग्नीशिया कहलाता है।
प्रकृति में यह हमेशा यौगिक के रूप में मिलता है क्योंकि यह अन्य तत्वों के साथ आसानी से घुलमिल जाता है। समुद्र का जल मैग्नीशियम का बड़ा स्त्रोत है। कंपनियां समुद्र से निकालकर इसका औद्योगिक इस्तेमाल करती हैं। विलयन पर यह चांदी जैसा सफेद और काफी हल्का हो जाता है। धातु के रूप में यह विषैला तत्व नहीं है, लेकिन जलाने पर यह विषैला प्रभाव रखता है। इसीलिए गर्म मैग्नीशियम का इस्तेमाल करते समय चेहरे को ढंककर रखना चाहिए। हालांकि यह हल्का तत्व है, इसके बावजूद यह काफी मजबूत होता है। यही वजह है कि इसे मिश्र धातुओं और अंतरिक्ष उद्योग के लिए उपयोगी माना जाता है। कुछ उच्च क्षमता वाले स्वचालित यंत्रों में भी इसका इस्तेमाल होता है।

 

 

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