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हेपेटाइटिस

यकृत यानी लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। वह भोजन पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में जो भी रासायनिक क्रियाएं एवं परिवर्तन (मेटाबॉलिज्म) होते हैं, उनमें लिवर विशेष सहायता करता है।

अगर यकृत सही ढंग से अपना काम नहीं करता या किसी कारण वे काम करना बंद कर देता है तो व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। लिवर को नुकसान पहुंचाने वाला हेपेटाइटिस भी एक गंभीर और खतरनाक रोग है।

हेपेट का अर्थ है जिगर और टाइटिस का मतलब है सूजन। हेपेटाइटिस से व्यक्ति के लिवर में सूजन आ जाती है। फलस्वरूप उसका जिगर सुचारु रूप से काम नहीं कर पाता और रोगी बाद में पीलिया का शिकार हो जाता है। अगर रोगी का तुरंत उपचार न किया जाए तो उसकी जान भी जा सकती है। यह एक वाइरस जनित रोग है जो मुख्यत: आदमी के लिवर को नुकसान पहुंचाता है।

अंतिम स्टेज में हेपेटाइटिस लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का कारण भी बनता है। समय पर इलाज न होने पर इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।

हेपेटाइटिस के प्रकार
ये मूलत: पांच प्रकार का होता है ए, बी, सी, डी, व ई। भारत में अगर अधिक क्रमवार तरीके से देखें तो ए, बी, सी और ई का संक्रमण है जबकि डी का संक्रमण यहां नहीं है।

लिवर शरीर में पाचन क्रिया का काम करता है। जो कुछ भी हम खाते वह शरीर में लिवर से होकर ही गुजरता है। यह टॉक्सिन व गंदे पदार्थो को हमारे खून से छानकर अलग करता है। हेपेटाइटिस बी व सी इसे ही नुकसान पहुंचाते हैं।

हेपेटाइटिस एड्स से अधिक खतरनाक मानी जा सकती है क्योंकि इस बीमारी में इससे ग्रसित रोगी की अचानक मृत्यु हो सकती है, जबकि एड्स का रोगी दस वर्ष तक जिंदा रह सकता है।

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