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कोबाल्ट-60

कोबाल्ट-60 सबसे अधिक इस्तेमाल में आने वाले रेडियोएक्टिव आइसोटोप्स में से है। प्राकृतिक तौर पर पाया जाने वाला कोबाल्ट अपनी प्रकृति में स्थायी होता है, लेकिन कोबाल्ट-60 कोबाल्ट का ही एक मानव-निर्मित रेडियोआइसोटोप है जिसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है। इसका जीवन 52 वर्ष का होता है।  

कोबाल्ट-60 परमाणु संयंत्रों की क्रिया से बनने वाला एक बाय-प्रोडक्ट होता है। कोबाल्ट-60 कई कामों में आता है जिनमें कैंसर का उपचार से लेकर इंडस्ट्रियल रेडियोग्राफी तक है, जिसमें यह किसी भी इमारत के ढांचे में कमी का पता लगाता है। इसके अलावा, चिकित्सा संबंधी उपकरणों की स्वच्छता, मेडिकल रेडियोथेरेपी, लेबोरेटरी इस्तेमाल के रेडियोएक्टिव सोर्स, फूड और ब्लड इरेडिएशन जैसे कार्यो में भी इस्तेमाल किया जाता है।

इस्तेमाल में बेशक यह पदार्थ बहुआयामी हैं, लेकिन इसके डिस्पोजल यानी इसे नष्ट करने में कई तरह की दिक्कतें आती हैं। भारत की ही तरह दुनिया भर में कई स्थानों पर इसे कचरे के तौर पर बेचे जाने के बाद कई दुर्घटनाएं हुई हैं, जिस कारण इसके संपर्क में आने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई घातक बीमारियों से जूझना पड़ा है।

धातु के कंटेनरों में बंद किए जाने के कारण यह अन्य कचरे के साथ मिलकर रीसाइक्लिंग संयंत्रों में अक्सर बिना पहचान में आए पहुंच जाता है। यदि इसे किसी संयंत्र में बिना पहचाने पिघला दिया जाए तो यह समूचे धातु को विषाक्त कर सकता है।

कोबाल्ट-60 जीवित प्राणियों में काफी नुकसान पहुंचाता है। कुछ समय पूर्व दिल्ली में मायापुरी इलाके में हुई दुर्घटना में भी कोबाल्ट-60 की चपेट में आए लोगों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे पहुंचे हैं। इनसान के शरीर में पहुंचने पर यह लिवर, गुर्दो और हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है। इससे निकलने वाले गामा विकिरण के संपर्क में ज्यादा देर रहने के कारण कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।

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  • Web Title:कोबाल्ट-60