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विटामिन सी

विटामिन-सी शरीर की मूलभूत रासायनिक क्रियाओं में यौगिकों का निर्माण और उन्हें सहयोग करता है। मनुष्य को विटामिन सी अलग से खाद्य पदार्थो के साथ ग्रहण करता है क्योंकि वह उसका स्वयं निर्माण नहीं करता। विटामिन सी फलों और सब्जियों से प्राप्त होता है।

शरीर में विटामिन सी कई तरह की रासायनिक क्रियाओं को अंजाम देता है जैसे कि न्यूरॉन्स तक संदेश पहुंचाना या कोशिकाओं तक ऊर्जा प्रवाहित करना आदि। इसके अलावा, हड्डियों को जोड़ने वाला कोलाजेन नामक पदार्थ, रक्त वाहिकाएं, लिगामेंट्स, कार्टिलेज आदि अंगों को भी अपने निर्माण के लिए विटामिन सी चाहिए होता है। यह विटामिन कोलेस्ट्रॉल को भी काबू में रखता है। लौह तत्वों को भी विटामिन सी से आधार मिलता है।

विटामिन सी का एक अन्य कार्य एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी होता है। अन्यथा एंटीऑक्सीडेंट ऐसे मॉलीक्यूल्स होते हैं जो बेतरतीब फैलाव से स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स इनसे डीएनए, प्रोटीन और काबरेहाइड्रेट्स की रक्षा करता है।

विटामिन सी लाल मिर्च, संतरे, अनानास, टमाटर, स्ट्रॉबेरी और आलू आदि में भी मिलता है। चूंकि यह घुलनशील तत्व होता है इसलिए कच्चे फल और सब्जियां इसके सबसे बड़े स्नोत हैं। प्रतिदिन एक औसत व्यक्ति को 80 मिलिग्राम विटामिन सी की आवश्यकता होती है। सेब के जूस से भी यह प्राप्त होता है, लेकिन इसे अलग तत्वों की मदद से भी ग्रहण किया जाता है। 

किसी भी स्थिति में एक दिन में विटामिन सी 1000 मिलिग्राम से अधिक नहीं लेना चाहिए। इससे अधिक वह शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है। विटामिन सी से स्कर्वी जैसे कुपोषण जनित रोगों पर भी रोक लगती देखी गई है। लेकिन इसके अन्य रोगों पर पड़ने वाले असर के संबंध में शोध अभी जारी हैं। इसलिए रोजाना की खुराक में विटामिन सी जरूरी है।

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