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पीएच मीटर

जैसे थर्मामीटर गर्मी और ठंड की जांच करता है, वैसे ही पीएच मीटर से द्रवों की अम्लीयता और क्षारीयता का मापन किया जाता है। अगर जांचे गए द्रव में अम्लीयता और क्षारीयता का लेवल बराबर रहता है, तो वह द्रव उदासीन होता है। पहला कमर्शियल पीएचमीटर 1936 में ब्रिटेन के डॉ. आर्नल्ड ओरविले बैकमैन ने बनाया था। कैलिफॉर्निया इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर बैकमैन को एक ऐसी डिवाइस बनाने को कहा गया, जो लेमन जूस की अम्लीयता जल्दी और सही माप सके। 

कैसे मापता है पीएच लेवल: अम्लीयता और क्षारीयता मापने के लिए पीएच मीटर में पीएच स्केल लगा होता है जो द्रव में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के आधार पर यह पता लगाता है कि द्रव अम्लीय है या क्षारीय या उदासीन। किसी द्रव को मापने पर अगर पीएच पैमाने पर 7 वैल्यू आती है तो इसका मतलब कि यह द्रव उदासीन है, इससे कम होने पर अम्लीय और अगर इस स्केल पर वह वैल्यू 7 से ज्यादा दर्शाए, तो यह द्रव क्षारीय होगा। पीएच मीटर डिजिटल डिवाइस होती है, जिसमें लगा वोल्टमीटर पीएच की जांच करता है

यानी अम्लीय द्रव सॉफ्ट होता है, जबकि क्षारीय द्रव भारी। पीएच मीटर न होने की स्थिति में द्रव में केमिकल एजेंट मिलाकर उसकी जांच की जाती है। पीला रंग, द्रव के अम्लीय होने की पुष्टि करता है, तो नीला उदासीन की और गाढ़ा भूरा क्षारीय होने के बारे में बताता है।
फायदा: पीएच मीटर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके माध्यम से द्रव की गुणवत्ता को परखा जाता है। कई तरह के पीएच मीटर ठोस पदार्थो जैसे बालू और भोजन की भी जांच के लिए काम आते हैं। एक्वेरियम में पानी की लगातार जांच के लिए कई लोग पीएच मीटर का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि खराब पानी में अकसर मछलियां मर जाती है। एक्विरियम में पीएच मीटर पड़ा रहता है और पानी के गंदा होने पर, वह पानी के खराब होने की सूचना दे देता है।

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