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पीटीसी

पास थ्रू सर्टिफिकेट यानी पीटीसी वह प्रमाणपत्र है, जो गिरवी रखी गई संपत्ति के एवज में निवेशक को जारी किया जाता है। पीटीसी बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा निवेशकों को जारी किए जाने वाले बॉन्ड या डिबेंचर के समान होते हैं। केवल पीटीसी को अंडरलाइंग सिक्योरिटीज के एवज में जारी किया जाता है।

सिक्योरिटीज पर मिलने वाला ब्याज निवेशक को निश्चित आय के रूप में होता है। प्राय पीटीसी में वित्तीय संस्थाएं जैसे-बैंक, म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां निवेश करती हैं। इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए हमें सिक्योराइटेजेशन के बारे में जानना होगा।

सिक्योराइटेजेशन: बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएं ग्राहकों को जो लोन या सेवाएं देती हैं, उन पर उन्हें ब्याज मिलता है या मूलधन वापस मिलता है। सिक्योराइटेजेशन के तहत मिलने वाली रकम या आय को कर्ज योजनाओं (डेट इंस्ट्रुमेंट) में परिवर्तित कर निवेशकों को बेचा जाता है। इसके लिए मूल कंपनी या बैंक एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीयू) बनाता है, जो डेट इंस्ट्रुमेंट जारी करने का काम करती है।

बाजार में इस डेट इंस्ट्रुमेंट की बिक्री से मूल कंपनी को नकदी हासिल होती है। वह इस रकम या फंड का इस्तेमाल अपने कारोबार के लिए कर सकती है। जब कोई निवेशक डेट इंस्ट्रुमेंट खरीदता है तो उसे पीटीसी जारी किया जाता है।

इसका मतलब यह नहीं कि पीटीसी के अंडरलाइंग एसेट पर निवेशक का अधिकार होता है। जब मूल कंपनी को दिए गए कर्ज की रकम या कर्ज पर ब्याज मिलता है तो वह उसे एसपीवी को स्थानांतरित कर देती है। एसपीवी इस रकम को फिक्स्ड इनकम के रूप में निवेशकों को दे देती हैं।

पास थ्रू सर्टिफिकेट और पे थ्रू सर्टिफिकेट: पास थ्रू सर्टिफिकेट में कंपनी को लोन पर मिलने वाला ब्याज या मूलधन सीधे निवेशक को दिया जाता है, जबकि पे थ्रूसर्टिफिकेट में ब्याज या मूलधन की रकम निवेशक को नहीं दी जाती। इसके बदले निवेशकों को एसपीवी द्वारा नई सिक्योरिटीज जारी की जाती हैं।

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