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टेस्टोस्टेरॉन

आर्थिक दबावों और बढ़ती महंगाई के अलावा सामाजिक समस्याओं के कारण पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन नामक हार्मोन के स्तर में गिरावट आती है और यह गिरावट आखिर में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याएं पैदा करती हैं। हाल के वर्षो में पति पत्नी घर, परिवार एवं दाम्पत्य संबंधों के बजाय कॅरियर, वेतन और पैसे आदि को लेकर ही अधिक चिंता का माहौल बना है। इनसे प्रभावित व्यक्ति के अंदर मौजूद टेस्टोस्टेरॉन का स्तर उसके सामाजिक व्यवहारों को प्रभावित करता है। यह लोगों की मानसिक शांति के साथ-साथ उनके यौन जीवन पर ही ग्रहण लगा रही है। इससे पुरुषों में यौन शक्ति पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक कायम रहने वाला तनाव पुरुषों में उक्त हार्मोन के स्तर को कम सकता है।
  
टेस्टोस्टेरॉन पुरुष यौन लक्ष्णों के विकास को बढ़ाता है और इसका संबंध यौन क्रियाकलापों, रक्त संचरण और मांसपेशियों के परिणाम के साथ साथ एकाग्रता, मूड और याद्दाश्त से भी होता है। जब कोई पुरुष चिड़चिड़ा या गुस्सैल हो जाता है तो लोग इसे उसके काम या उम्र का प्रभाव मानते हैं। पर यह टेस्टोस्टेरॉन की कमी से भी होता है। एक परीक्षण में पाया गया कि इससे प्रभावित अधिकतर लोग 35 साल से कम उम्र के थे और कुछ की तो एक दो साल पहले ही शादी हुई थी। इसके अनुसार टेस्टोस्टेरॉन का स्तर फैसले लेने में अहम रोल निभाता है। और जिन रोगियों में

उनकी जानकारी के बगैर इसका स्तर बढ़ाया गया, उनका सामाजिक व्यवहार अन्य की तुलना में समाज के प्रति ज्यादा सकारात्मक हो गया। जिन रोगियों का मानना था कि टेस्टोस्टेरॉन अधिकता से आक्रामक व्यवहार उत्पन्न होता है अथवा जिन्होंने जानकारी में मात्र ली, उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम ठीक रहा। पुरुषत्व के हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन मांसपेशियां सुगठित बनाने में भी मददगार होता है, डाक्टरों का कहना है कि टेस्टोस्टेरॉन की ज्यादा मात्र के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

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