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कड़ी ठंड से होने वाले रोग हाइपोथर्मिया से न डरें

हाइपोथर्मिया ऐसी स्थिति होती है जिसमें शरीर का तापमान, सामान्य तापमान से कम हो जाता है। यानी इसमें शरीर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस (95 डिग्री फारहेनाइट) से कम हो जाता है। इसको चार विभिन्न श्रेणियों में बांटा जा सकता है। पहला हल्का 32-35 डिग्री सेल्सियस (90-95 डिग्री फारेनहीट), मॉडरेट 28-32 डिग्री सेल्सियस (82-90 डिग्री फारेनहीट), गंभीर 20-28 डिग्री सेल्सियस (68-82 डिग्री फारेनहीट) और 20 डिग्री सेल्सियस से कम (68 डिग्री फारेनहीट)।

कारण
जिंदगी को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई रासायनिक क्रियाओं की आवश्यकता होती है। आवश्यक तापमान बरकरार रखने के लिए मानव दिमाग कई तरीके अपनाता है। जब ये मैकेनिज्म बिगड़ जाती है तब ऊष्मा के उत्पादन के स्थान पर ऊष्मा का ह्रास तेजी से होता है। कभी-कभार बीमारी की वजह से शरीर का तापमान प्रभावित होता है। ऐसे में शरीर का कोर तापमान किसी भी माहौल में बिगड़ सकता है। इसे सेंकेडरी हाइपोथर्मिया कहा जाता है।

पहली स्थिति में शरीर का तापमान सामान्य तापमान से 1 से 2 डिग्री कम हो जाता है। इस स्थिति में रोगी के हाथ सही तरीके से काम नहीं करते। सबसे ज्यादा परेशानी रोगी के पेट में होती है और वह खुद को थका हुआ महसूस करता है। शरीर का तापमान, सामान्य से 2 से 4 डिग्री कम हो जाता है। इस स्थिति में कंपकंपाहट तेज हो जाती है। रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। व्यक्ति पीला पड़ जाता है और उंगलियां, होंठ और कान नीले पड़ जाते हैं। जब शरीर का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से कम हो जाता है तो कंपकपाहट खत्म हो जाती है। इस दौरान बोलने में दिक्कत, सोचने में परेशानी और एमनीशिया की स्थिति होती है। साथ ही सेल्युलर मेटाबोलिक रेट रुक जाता है। 30 डिग्री से कम तापमान होने पर त्वचा नीली पड़ जाती है। यहीं नहीं, चलना असंभव हो जाता है। शरीर के कई अंग फेल हो जाते हैं।

इतिहास
कई युद्धों की सफलता और विफलता के पीछे हाइपोथर्मिया रहा है। पहले और दूसरे विश्व युद्ध में हाइपोथर्मिया की वजह से कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। 218 बीसी में हैनिबल की लड़ाई में असंख्य लोग हाइपोथर्मिया के कारण काल के गाल में समा गए थे। 1812 में रूस में नेपोलियन की सेना को हाइपोथर्मिया की वजह से कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।

नुकसानदायक है एल्कोहल
सर्दी में एल्कोहल पीने के बाद अगर आपको गर्मी महसूस होती है तो ये आपके लिए चेतावनी है। आप हाइपोथर्मिया के शिकार हो सकते हैं। जब आपको ठंड लगती है तो आपकी हृदय गति बढ़ती है। कई अंगों की मांसपेशियां खुद को गर्म रखने के लिए ऊर्जा बाहर निकालती हैं। इस दौरान खून का प्रवाह भी कम हो जाता है जिससे पैरों और हाथों में ठंड महसूस होती है। एल्कोहल का सेवन करने से हाथ और पैरों की रक्त शिराएं फैलती हैं। यही नहीं, आपको इस बात का भ्रम होता है कि हाथ, पैर गर्म हैं।

लक्षण
-कंपकंपाहट
-धीमी, रुकती आवाज
-आलस्य
-कदमों में लड़खड़ाहट
-हृदयगति, सांस और ब्लड प्रेशर बढ़ना

किसे ज्यादा खतरा
-जवान और बुजुर्ग
-जिनको डायबिटीज या इससे जुड़ी बीमारियां हैं
-जो एल्कोहल या ड्रग का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं

बरतें सावधानी
-घर से बाहर निकलने के दौरान ध्यान रखें कि आपका सिर, गला और कान पूरी तरह से ढका हुआ हो।
-घर से बाहर निकलने से पहले स्नैक या खाना खाकर जरूर निकलें।
-अगर काफी थके हों तो आराम कर लें क्योंकि थकान के दौरान खुद को गर्म रख पाना काफी मुश्किल होता है।
-शरीर को गर्म रखने के लिए कपड़े खूब पहनें।
-खुद को गर्म रखने के लिए नशीले पेय जैसे कॉफी या चाय का सेवन न करें।
-वॉर्म कूलर के सीधे एक्सपोजर से बचें।
-अगर समस्या ज्यादा हो तो लेट लतीफी न करें और डॉक्टर से तुरंत परामर्श लें।

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