DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खेलें ऑफिस-ऑफिस

ऑफिस में साथियों से बन रही दूरियों को मिटाने के लिए क्यूबिकल गेम एक अच्छा विकल्प है। साथ ही यह कई ट्रेनिंग प्रोग्राम का अहम हिस्सा भी बन गया है। इसके अलावा नए ज्वॉइन कर रहे कर्मचारी भी इंडक्शन की प्रक्रिया गेमिफिकेशन के जरिए ही पूरी कर रहे हैं। क्या है यह क्यूबिकल गेम और ऑफिस में यह कैसे खेला जाता है, जानते हैं चनप्रीत खुराना से

इन दिनों जो ट्रेंड खासतौर से उभर कर आया है, वह है क्यूबिकल गेम। यानी ऑफिस टाइम में ही आप कुछ लोग मिल कर किसी इनडोर गेम में शिरकत करें और उस एनर्जी का इस्तेमाल अपने रोजमर्रा के ऑफिस कार्यों में करें। देखते हैं, क्या है इसमें खास-

टीम वर्क
माइनक्राफ्ट एक ऐसा गेम है, जो इन दिनों ऑफिस में काफी लोकप्रिय हो गया है। इसमें अत्याधुनिक क्रियेटिविटी व स्ट्रेटेजी के तत्व शामिल हैं। निस्संदेह इससे टीम वर्क में फायदा मिलता है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे खरीदने वालों का आंकड़ा दो करोड़ के पार पहुंच गया है। करीब 1700 रुपए में खरीदा जाने वाला यह गेम ऑफिसों में खूब खेला जाने लगा है। मजेदार बात यह है कि दुनियाभर में लोग यूट्यूब के जरिए इससे जुड़े अपने-अपने अनुभवों को भी साझा कर रहे हैं।

चुनौतियां
अगर वर्कप्लेस में गेमिफिकेशन अनिवार्य हो जाए तो कर्मचारियों की कई छिपी हुए प्रतिभाएं सामने आएंगी। यह न दूसरों को प्रेरित करने में असरदार होगा, बल्कि गेम के सहारे हर दिन कुछ न कुछ नया सीखने को भी मिलेगा। एक्सपर्ट्स की मानें तो गेमिफिकेशन से कई समस्याओं से उबरा जा सकता है। यानी असल कार्य को भी जब आप गेम के नजरिए से देखने लगेंगे तो उस कार्य को बेहतर ढंग से पूरा करना आसान होगा, क्योंकि गेम में मिल रही चुनौतियों को आप हंस कर स्वीकार करते हैं। प्रतियोगिता की हार-जीत  को प्रसन्नता से लेते हैं।

मूर्थी के. उप्पलपुरी, एमडी व सीईओ, एचआर कंसल्टेंसी रैंडस्टेड, भारत-श्रीलंका  कहते हैं,' गेम में आप जीतने के लिए खेलते हैं, मगर हारने पर बहुत निराश भी नहीं होते। गेमिफिकेशन सिर्फ किसी खेल को खेल कर महज प्वॉइंट एकत्र करना नहीं है, बल्कि दिन खत्म होते-होते इससे कर्मचारी खुद को प्रेरित करने वाली ऊर्जा से लबरेज पाते हैं और गहराई से मनुष्य की साइकोलॉजी की समझ विकसित करने में भी कामयाब हो जाते हैं।'

इसे लागू करना
गेमिफिकेशन कंपनी ईमी के सीईओ सिद्धेश भोबे कहते हैं, 'अगर गेमिफिकेशन को कंपनी के वरिष्ठ लोग कायदे से लागू नहीं कर पाते तो यह न सिर्फ एक मजाक बन कर रह जाता है, बल्कि ऑफिस में गेमिफिकेशन टिक भी नहीं पाता। मसलन मेरा मैनेजर कुछ बिंदुओं को तो सही ठहराए, मगर रिजल्ट एरियाज पर ध्यान न दे तो खेल के प्रति मेरा मोटिवेशन कहां रहा जाएगा! हर कोई चाहता है कि किसी भी रोल में उसकी अहमियत बनी रहे।' देश में गेमिफिकेशन दबे पांव करीब 2-3 वर्ष पहले एंट्री ले चुका है। कुछ कंपनियां अभी भी इसे सिर्फ टैस्ट ही कर रही हैं या फिर सेल्स जैसे किसी विभाग में लागू कर खुश हो रही हैं। कुछ भी हो, यह नया ट्रेंड चल निकला है और कंपनी और कर्मचारी इसे लेकर उत्साहित भी हैं।


टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
बेंगलुरू स्थित एसेंचर के मैनेजिंग डायरेक्टर एचआर, पराग पांडे बताते हैं कि हमारे सामने उद्देश्य था कि कुछ नया सीखना है। हमें याद रखना चाहिए कि टेक्नोलॉजी के इस दौर में हर दिन नई-नई चुनौतियां मिलना लाजिमी है। काम करने के कायदों में भी हर छह माह में बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में हर रोज क्लाइंट के लिए नए आइडियाज की जरूरत है। जाहिर है हमारे एक लाख से अधिक कर्मचारियों को साल भर कुछ नया सीखते रहना होगा। कभी-कभी चीजें एकदम नई होती हैं। सीखने के लिए परंपरागत तरीके तो हमारे पास हैं ही, जैसे क्लासरूम ट्रेनिंग, वीडियो मॉड्यूल, जिन्हें कभी भी, कहीं भी देखा जा सकता है। इसके अलावा वेबसाइट्स जैसे सीखने के अन्य स्त्रोत भी मौजूद हैं। पांडे कहते हैं कि देश भर के एक लाख कर्मचारियों  के लिए क्लासरूम ट्रेनिंग का आयोजन करना किसी ख्वाब जैसा ही लगता है। ऐसी ही चुनौतियों का जवाब है गेमिफिकेशन।


संसाधनों का इस्तेमाल
कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे अपने सहयोगियों का साथ देकर टीम वर्क में अपनी प्रतिभा को बाहर निकालें। पुणे आधारित तेराग्नि कंसल्टिंग में 25 लोगों की टीम है। फाउंडर डायरेक्टर हर्ष कपूर पिल्लै के मुताबिक आमतौर पर हमारे कर्मचारी ऑन साइट यानी कस्टमर के ऑफिस से कार्य करते हैं। इस वजह से सभी 25 कंसल्टेंट्स को आपस में मिलने का मौका नहीं मिल पाता। इससे हमें दो मोर्चों पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। बजाए इसके कि किसी खास कार्य के लिए उस काम के जानकार को चुना जाता, लोग बार-बार अपनी सुविधानुसार एक ही टीम को चुनते। इससे कुछ कर्मचारी तो कार्य के अत्यधिक दबाव में रहने लगे, वहीं कुछ के पास न के बराबर काम रहता था। तेराग्नि में गेमिफिकेशन का प्रयोग करीब एक साल पहले किया गया। सबसे पहले इसके लिए एक पैनल बनाया गया।

इसमें कायदों को अच्छे से समझाया गया और इसे इस तरह डिजाइन किया गया, जिससे कर्मचारी अपने साथियों द्वारा दी गई मदद का आभार प्रकट करने के लिए उन्हें स्टार दे।  'तुमने मुझे खुश कर दिया' या 'तुमने सचमुच कुछ मजेदार किया है' जैसे स्टिकर दिए गए। स्टार स्टिकर्स को कैफेटेरिया में एक चार्ट के जरिए लगाया गया, जिससे हर कोई उसे देख सके। पैनल तिमाही या साल के अंत में उनका विश्लेषण करते। ये स्टार स्टिकर्स सब कुछ बयां कर देते। इसका फायदा जूनियर कर्मचारियों तक को होने लगा। 23 वर्ष की सबसे कम उम्र की कर्मचारी ने इन स्टार के बदौलत ही एक लाख का ट्रेनिंग प्रोग्राम जीता। सामान्य प्रक्रिया में शायद ही कभी उसे ऐसा मौका मिल पाता। कपूर पिल्लै के मुताबिक अब टीम का नजरिया बदल गया है और  टीम मेंबर्स एक दूसरे के साथ अधिक सहज रहने लगे हैं।

नई नियुक्ति पर

मेकमाईट्रिप, गुड़गांव के ऑफिस में  गेमिफिकेशन का अंदाज कुछ निराला है। वे इस खेल की शुरुआत ही नए ज्वॉइन करने वाले कर्मचारियों से करते हैं।  इन कर्मचारियों की संख्या आमतौर पर 30 होती है। पहले दिन इस गेमिफिकेशन के बूते नए कर्मचारी खेल-खेल में इंडक्शन जैसे उबाऊ से लगने वाले प्रोग्राम को मनोरंजन में बदल पाते हैं। वे  सीखते हैं कि उन्हें ग्राहकों से कैसे पेश आना है, विदेशी जमीन पर अपने कस्टमर्स से कैसे डील करना है व उनकी मदद कैसे करनी है आदि।


सॉफ्ट स्किल्स सीखने का मौका
इन गेम्स में कर्मचारियों को 4-5 टीमों में बांट दिया जाता है। उन्हें बहुत से टास्क दिए जाते हैं। मसलन टास्क में उन्हें कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट युवराज श्रीवास्तव को ढूंढ़ना था तो इसके लिए नए कर्मचारियों ने गार्ड से पूछा, टेबल या केबिन के बाहर लगी नेमप्लेट का सहारा लिया आदि। इस तरह कर्मचारियों को टास्क के जरिए न केवल कुछ सीनियर्स से सीधे मिलने का मौका मिला, वहीं उन्होंने सॉफ्ट स्किल्स भी सीखीं, जो उनके लिए किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम जैसी ही थीं।

जिज्ञासा होती है शांत
कुलविंदर सिंह, सीनियर डायरेक्टर ग्लोबल मार्केटिंग कम्युनिकेशन, सिनेक्रोन के मुताबिक नए कर्मचारियों के जेहन में कंपनी के बारे में जानने की जिज्ञासा होती है। उनके मन में ढेर सारे सवाल होते हैं, जैसे ड्रेस कोड, ट्रांसपोर्ट, भत्ते आदि। इन गेम्स के जरिए उन्हें इंडक्शन के दौरान खेल-खेल में ही बहुत सी जानकारियां मिल जाती हैं, जिन्हें वे भूलते नहीं।
Mint

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:खेलें ऑफिस-ऑफिस